1/84 श्री अगस्त्येश्वर महादेव

1/84 श्री अगस्त्येश्वर महादेव

1/84 श्री अगस्त्येश्वर महादेव : महाकाल वने दिव्ये यक्ष गन्धर्व सेविते । उत्तरे वट यक्षिण्या यत्तल्लिङ्गमनुत्तमम् ।। अगस्त्येश्वर महादेव मंदिर उज्जैन में हरसिद्धि मंदिर के पीछे स्थित संतोषी माता मंदिर परिसर में है। अगस्त्येश्वर महादेव मंदिर की स्थापना ऋषि अगस्त्य, उनके क्षोभ और महाकाल वन में उनकी तपस्या से जुडी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब दैत्यों का आधिपत्य देवताओं पर बढ़ने लगा तब निराश होकर देवतागण पृथ्वी पर भ्रमण करने लगे। एक दिन जब…

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2/84 श्री गुहेश्वर महादेव

2/84 श्री गुहेश्वर महादेव

2/84 श्री गुहेश्वर महादेव : तत्रास्ते सर्वदा पुण्या सप्तकालपोद्भवा गुहा। पिशचेश्वरदेवस्य उत्तरेण व्यवस्थिता ।। उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक गुहेश्वर महादेव का मंदिर रामघाट पर पिशाच मुक्तेश्वर के पास सुरंग के भीतर स्थित है । गुहेश्वर महादेव का पौराणिक आधार ऋषि मंकणक, उनके अभिमान और फिर उनकी तपस्या से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में एक महायोगी थे जिनका नाम मंकणक था। वे वेद-वेदांग में पारंगत थे। वे सिद्धि…

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3/84 श्री ढूँढ़ेश्वर महादेव

3/84 श्री ढूँढ़ेश्वर महादेव

3/84 श्री ढूँढ़ेश्वर महादेव : तत्रास्ते सुमहापुण्यं लिंगं सर्वार्थ साधकम्। पिशाचेश्वर सांनिध्ये तमाराधय सत्वरम्।। ढुंढेश्वर महादेव मंदिर अवंतिका के प्रसिद्ध रामघाट के पास स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कैलाश पर्वत पर ढुंढ नामक गणनायक था जो की कामी और दुराचारी था। एक बार वह इन्द्रलोक की अप्सरा रम्भा को नृत्य करता देख उस पर आसक्त हो गया। वहां उसने रम्भा पर एक पुष्प गुच्छ फैंक दिया। यह देखकर इंद्र अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने…

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4/84 श्री डमरुकेश्वर महादेव

4/84 श्री डमरुकेश्वर महादेव

4/84 श्री डमरुकेश्वर महादेव : अश्वमेघसहस्त्रं तु वाजपेयशतं भवेत्। गो सहस्त्रफलं चात्र द्रष्ट्वा प्राप्स्यन्ति मानवाः।। चौरासी महादेव में से एक डमरुकेश्वर महादेव की पौराणिक गाथा रूद्र नाम के एक महाअसुर और उसके पुत्र वज्रासुर से शुरू होती है। वज्रासुर महाबाहु तथा बलिष्ठ था। शक्तियां अर्जित करने वाले इस महाअसुर के दांत तीक्ष्ण थे और इसने अपनी शक्तियों के बल पर देवताओं को उनके अधिकार से विमुख कर दिया एवं उनके संसाधनों पर कब्जा कर उन्हें…

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5/84 श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव

5/84 श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव

5/84 श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव : अनादिकल्पेश्वरं देवं पंचमं विद्धि पार्वती। सर्व पाप हरं नित्यं अनादिर्गीयतेसदा।। प्रस्तावना : पुराणानुसार श्री रूद्र परमात्मा देवाधिदेव महादेव अनादिकल्पेश्वर महादेव के बारे में माता पार्वती को बताते हैं। वे कहते हैं यह लिंग कल्प से भी पहले प्रकट हुआ है। उस समय अग्नि, सूर्य, पृथ्वी, दिशा, आकाश, वायु, जल,चंद्रग्रह, देवता, असुर, गन्धर्व,पिशाच आदि भी नहीं थे। इसी लिंग से देव, पितृ, ऋषि आदि के वंश उत्पन्न हुए हैं। इस लिंग से…

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6/84 श्री स्वर्णजालेश्वर महादेव

6/84 श्री स्वर्णजालेश्वर महादेव

6/84 श्री स्वर्णजालेश्वर महादेव : स्वर्ण ज्वालेश्वरं षष्ठं विद्धि चात्र यशस्विनी। यस्य दर्शन मात्रेण धवानिह जायते। । पौराणिक आधार एवं महत्व : एक समय भगवान शिव और माता पार्वती को सांसारिक धर्म में सलंग्न रहते सौ वर्ष हो गए लेकिन तारकासुर वध हेतु उन्हें कोई पुत्र उत्पन्न नही हुआ। तब देवताओं ने अग्नि देव को शिवजी के पास भेजा। शिवजी ने त्रैलोक्य हित के लिए अपना अंश अग्नि देव के मुख में स्थान्तरित कर दिया। अग्नि…

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7/84 श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव

7/84 श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव

7/84 श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव : त्रिविष्टपेश्वरं देवि सप्तमं पर्वतात्मजे। यस्य दर्शन मात्रेण लभ्यते तत्रिविष्टपम्।। परिचय : चौरासी महादेव में से एक त्रिविष्टपेश्वर महादेव की स्थापना स्वयं देवताओं ने की है जो महाकाल वन की सुंदरता और महत्ता दर्शाती है। पौराणिक आधार: पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार देवऋषि नारद स्वर्गलोक में इंद्र देव के दर्शन करने गए। वहां इंद्र देव ने महामुनि नारद से महाकाल वन का माहात्म्य पूछा। तब नारद मुनि ने कहा महाकाल वन सब…

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8/84 श्री कपालेश्वर महादेव

8/84 श्री कपालेश्वर महादेव

8/84 श्री कपालेश्वर महादेव : तस्मिनक्षेत्रे महलिङ्गम गजरूपस्य सन्निधौ। विद्यते पश्य देवेश ! ब्रम्हहत्या प्रणश्यति।। परिचय : उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक श्री कपालेश्वर महादेव की महिमा के साक्षी स्वयं महादेव हैं। श्री कपालेश्वर महादेव की आराधना कर स्वयं महादेव का ब्रम्ह हत्या दोष निवारण हुआ। पौराणिक आधार एवं महत्व : पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेता युग में एक बार ब्रम्हाजी यज्ञ कर रहे थे। यह यज्ञ महाकाल वन में किया जा रहा था। वहां…

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9/84 श्री स्वर्गद्वारेश्वर महादेव

9/84 श्री स्वर्गद्वारेश्वर महादेव

9/84 श्री स्वर्गद्वारेश्वर महादेव : स्वर्गद्वारेश्वर लिङ्ग नवमं विद्धि पार्वती। सर्व पाप हरं देवि स्वर्ग मोक्ष फल प्रदम। । परिचय : उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक श्री स्वर्गद्वारेश्वर महादेव की महिमा गणों और देवताओं के संघर्ष व देवताओं की स्वर्ग प्राप्ति से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार श्री स्वर्गद्वारेश्वर के पूजन अर्चन से इंद्र समेत सभी देवताओं को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी। पौराणिक आधार : पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माता…

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10/84 श्री कर्कोटकेश्वर महादेव

10/84 श्री कर्कोटकेश्वर महादेव

10/84 श्री कर्कोटकेश्वर महादेव : कर्कोटकेश्वर- संज्ञं च दशमं विद्धि पार्वती। यस्य दर्शन मात्रेण विषैर्नैवाभिभूयते। । परिचय : श्री कर्कोटकेश्वर महादेव की स्थापना की कथा कर्कोटक नामक सर्प और उसकी शिव आराधना से जुड़ी हुई है। श्री कर्कोटकेश्वर महादेव की कथा में धर्म आचरण की महत्ता दर्शाई गई है। पौराणिक आधार एवं महत्व : पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार सर्पों की माता ने सर्पों के द्वारा अपना वचन भंग करने की दशा में श्राप दिया कि…

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