क्षिप्रा नदी

क्षिप्रा नदी

श्री शीप्रा नदी भी गंगा नदी की तरह पवित्र एवं पापों का नाश करने वाली नदी है। इसके तट पर कुछ दिनों तक रहने के दौरान स्नान आदि किया जाए तो मनुष्य संर्पूण पापों से मुक्त हो जाता है। शिप्रा नदी तो सर्वत्र पुण्यमयी है। यह ब्रहमहत्या आदि पापों का नाश करने वाली है।

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कालिदास अकादमी

कालिदास अकादमी

यह संस्था काठी रोड पर स्थित है। इसकी स्थापना उज्जैन के महाकवि एवं नाट्य लेखक कालिदास पर शोध करने की दृष्टि से हुई है। इसमें प्रतिवर्ष देवोत्पथापनी एकादशी से सात दिवस का कालिदास समारोह मनाया जाता है।

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के .डी पेलेस

के .डी पेलेस

यह स्थान सिद्धनाथ से करीब तीन किलोमीटर और स्टेशन से करीब 11 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यहां पर सूर्य देवता का मंदिर था एवं इस स्थान के निकट ही कालियादेह ग्राम भी स्थित है। इस स्थान को पुराणों में ब्रहमकंुड भी कहा जाता है। चार सौ वर्ष पूर्व नसीरूद्दीन खिलजी ने मूल स्थान को तोडकर कालियादेह महल बनवाया था।  यह महल प्राचीन महलों में से एक है। यह स्थान अब एक जीर्ण स्थान में…

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जंतर मंतर (वेद शाला )

जंतर मंतर (वेद शाला )

खगोलशास्त्र के अध्ययन का प्रारंभ कब से हुआ, इसका निर्णय इतिहास के क्षेत्र के बाहर है। जिस प्रकार मानव उत्पत्ति का आरंभ-काल अनिर्णीत है, उसी प्रकार आकाशस्थ ज्योति पुंजों की ओर मानव की जिज्ञासा कब जाग्रत हुई, इसका समय निश्चित करना असंभव है। ऋग्वेद संसार की प्राचीनतम रचना है। इस ग्रंथ में खगोलीय घटनाओं का उल्लेख अनेक ऋचाओं में वर्णित है। धार्मिक, ऐतिहासिक एंव ज्योतिर्विज्ञान के क्षेत्र में उज्जैन का प्रमुख स्थान है। इसी नगरी…

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भर्तहरी गुफा

भर्तहरी गुफा

शिप्रा तट के ऊपरी भाग में भर्तृहरि की गुफा है। एक संकरे रास्ते से गुफा के अंदर जाना पड़ता है। कहते हैं गुफा से चारों धाम जाने के लिए मार्ग है, जो अब बंद है। यह नाथ संप्रदाय के साधुओं का प्रिय स्थान है और योग साधना के लिए उत्तम माना जाता है। कई साधु यहां बरसों से साधना करते हुए देखे जा सकते हैं। यह स्‍थान गढ़कालिका मंदिर के पास स्थित है। इन गुफाओं के…

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महर्षि सांदीपनि आश्रम

महर्षि सांदीपनि आश्रम

महर्षि संादीपनि आश्रम शीप्रा नदी पर स्थित गंगा घाट के समीप स्थित है। भगवान श्रीकृष्ण एवं उनके सखा सुदामा ने यहां पर महर्षि सांदीपनि जी से शिक्षा ग्रहण कि थी। इस स्थाप पर एक कुंड भी स्थित है जिसे गोमती कुंड के नाम से जाना जाता है। इस स्थान पर गुरू संादीपनिजी, कृष्ण, बलराम एवं सुदामा की मनोहारी मर्तियां भी विराजमान है।

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