कविताएँ

              प. सुभाष शर्मा मंगल
                  (हास्य कवि )
                       उज्जैन

सुखी दाम्पत्य जीवन
एक मित्र बोला यार एक बात बताओ
कैसे जीते हो सुखी दाम्पत्य जीवन इसका राज बताओ 
मेँ मुस्करया मै फुस फुसाया  
मैंने अपनी ही पीठ को थप थपाया 
मैंने कहा सुन ले यार एक सूत्र को करले याद. 
कि यदि पत्नी हो जाय अंधी और पति हो जाय बेरा. 
तो दाम्पत्य जीवन सुखी हो जाय तेरा |
हास्य कवि प. सुभाष शर्मा मंगल उज्जैन
सुहागन
चीन अकड़ कर हमसे बोला हमने बनाई है Ak56गन.
और तुम भारत वाले हथियार की दौड़ मे हो पुरे ढक्कन
फिर अमेरिका तन कर हमसे बोला हमने बनाई Ak47गन.
सारी दुनिया के दादा है अपन
उन दोनों की बाते सुनकर अपना हुआ बहुत दिमाग़ खराब.
और मैंने भी दे दिया उन्हें जवाब.
अरे हमें जरूरत नहीं है किसी गन की
यहां तो एक से बड़कर एक जन है.
यहां हर घर मे होती सुहागन है.
वे मुझसे पूछने लगे ये सुहागन क्या होती है.
तब मेने बताया की सुहागन ज़ब चालू होती है तो बड़े से बड़ा दादा, पहलवान आउट हो जाते है
और शेर भी सुहागन के आगे मिममीयाने लगते है |
हास्य कवि प. सुभाष शर्मा मंगल उज्जैन