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उज्जैन:पुलिस-जिला प्रशासन-नगर निगम में सामंजस्य का अभाव दिखा…
सुबह से दूध की गाडिय़ां रोकना शुरू कर दी एडीएम के हस्तक्षेप के बाद शहर में आया दूध
उज्जैन – आज सुबह शहरवासी खुले दूध के लिए भटकते रहते। रोजाना की तरह शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों से दूध लेकर अंचलों से आई दूध उत्पादकों की गाडिय़ों को पुलिसकर्मियों ने रोक दिया। प्रमुख मार्गों पर दूध वालों को रोकने के बाद पुलिसकर्मियों ने कहा कि प्रशासन ने शहर में दूध-सब्जी-फल सभी बंद कर दिया है। आप लोग वापस अपने गांव चले जाओ। जब इस बात की जानकारी दूध विक्रेताओं को लगी तो वे चिंता में पड़ गए। उन्होंने एसडीएम को मोबाइल फोन किया तो वे बोले- मैं कुछ नहीं कर सकता। वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करो। इस पर दूध विक्रेताओं ने दैनिक अक्षरविश्व से संपर्क किया।
जब एडीएम डॉ. आरपी तिवारी को सुबह 6 बजे मोबाइल फोन करके सारी बात बताई तब उन्होने वायरलेस सेट पर सभी पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए कि प्रवेश मार्गो से शहर में आने वाले दूध वाहनों को न रोका जाए।
इसके बाद शहर में दूध आ पाया। चारभूजा दूध डेयरी के संचालक एवं दूध विक्रेताओं की संघ के पदाधिकारी उमेश पंवार के अनुसार यदि शहर में दूध नहीं आता तो हाहाकार मच जाता, क्योंकि आज भी खुले दूध की मांग सर्वाधिक है और प्रशासन के आदेश पर घर-घर जाकर दूध का विक्रय हमारे द्वारा करवाया जा रहा है।
प्रशासन में तालमेल नहीं –
दूध और फल को लेकर जो मामला सामने आया, उसे लेकर अनौपचारिक चर्चा में अधिकारियों का कहना था कि नगर निगम-प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय के अभाव के कारण यह हालात बने। इसके लिए यह आवश्यक है कि किसी भी सार्वजनिक निर्णय को लेकर, जो कि सभी विभागों से सबंधित हो, संयुक्त आदेश एवं प्रेस विज्ञप्ति जारी हो, ताकि सभी विभाग तालमेल बैठा सके।