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ऑडिट रिपोर्ट : गंभीर से जितना पानी रोज ले रहे हैं, उसमें से 45% ही पहुंच रहा है घरों तक
उज्जैन । पिछले साल बारिश के बाद गंभीर डेम लबालब हो गया था लेकिन इस बार मानूसन में देरी और फिर कम बारिश हुई तो जुलाई में ही जलसंकट क्यों खड़ा हो गया ? शहर की साढे पांच लाख की आबादी से जुड़े इस सवाल का जवाब दिया है वाटर ऑडिट रिपोर्ट ने। अमृत मिशन के तहत एक प्राइवेट एजेंसी से तैयार कराई गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गंभीर डेम से शहर में सप्लाई के लिए जितना पानी लिया जा रहा है, उसमें से 45 फीसदी ही टंकियों तक पहुंच पाता है। बाकी 55 फीसदी पानी का कोई हिसाब किताब ही नहीं है। विभाग इसे डायरेक्ट सप्लाई और लीकेज बताता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक दिन में जितना पानी बर्बाद हो रहा उसे रोक लिया जाए तो शहर में सालभर 24 घंटे पानी सप्लाई हो सकता है। शहर की जरूरत 3 एमसीएफटी पानी की है जबकि 1.89 एमसीएफटी पानी ही सप्लाई हो पा रहा है। यानी नागरिकों को 135 लीटर प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति के मापदंड के अनुसार पानी नहीं मिल रहा। जबकि नलकूप, कुएं, हैंडपंप से भी शहर में करीब 7.5 एमएलडी पानी मिलता है।
गंभीर डेम में सोमवार की स्थिति में 207 एमसीएफटी पानी है। पिछले गुरुवार को 76 एमसीएफटी पानी था। शिप्रा के पानी का उपयोग पीएचई को सप्लाई के लिए लेना पड़ रहा है। साल दर साल बारिश के पहले जून-जुलाई में आने वाले जलसंकट को देखते अमृत मिशन में 25 करोड़ रु. जलप्रदाय व्यवस्था में सुधार के लिए मंजूर किए हैं। योजना के तहत निगम ने नागपुर की एक एजेंसी को वाटर ऑडिट का काम दिया है। कंपनी ने अंतरिम रिपोर्ट नगर निगम को प्रस्तुत कर दी है।