- बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!
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- सभा मंडप से गर्भगृह तक अनुष्ठानों की श्रृंखला, भस्म अर्पण के बाद साकार रूप में हुए महाकाल के दर्शन; जल और पंचामृत से अभिषेक, रजत मुकुट और शेषनाग श्रृंगार के साथ खुले मंदिर के पट
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चंद्र और त्रिपुंड तिलक लगाकर भस्मारती में सजे बाबा महाकाल, फाग उत्सव की हुई शुरुआत
सार
विस्तार
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का पूजन किया। बाबा महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से कर पूजन अर्चन किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया।
कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष व पुष्पों की माला धारण करवाई गई। आज के श्रृंगार की विशेष बात यह रही कि त्रयोदशी की भस्मआरती में बाबा महाकाल का चंद्र और त्रिपुंड तिलक लगाकर भांग से श्रृंगार किया गया। साथ ही चांदी के हर मुंड की माला बाबा महाकाल को धारण करवाई गई। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान हजारों पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गुंजायमान हो गया।

महाकाल के आंगन में हुई फाग उत्सव की शुरुआत
इधर, शुक्रवार की सुबह महाकाल मंदिर परिसर स्थित कोटितीर्थ कुंड के पास भस्मारती के नियमित दर्शनार्थियों ने फाग उत्सव मनाया गया। होली से दो दिन पहले महाकाल मंदिर में जमकर गुलाल उड़ाया गया। भजन गाती महिलाओं और उड़ते गुलाल को देख बड़ी संख्या में मंदिर दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु भी फाग उत्सव में रमे हुए दिखाई दिए। महाकाल मंदिर के नियमित दर्शनार्थी एसएन शर्मा और दिव्या ने बताया कि बाबा महाकाल के आंगन में फाग उत्सव का मजा ही कुछ और होता है। वर्षों से हम इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं। आज भी सबसे पहले बाबा महाकाल को हरि ओम जल अर्पित किया और फिर हर्बल गुलाल लगाकर फाग उत्सव की शुरुआत की। जिसके बाद फाग गीत गाकर एक दूसरे को गुलाल लगाया।

जयपुर के भक्त ने चांदी का छत्र दान किया
श्री महाकालेश्वर मंदिर में पुजारी इंद्र नारायण शर्मा की प्रेरणा से राजस्थान के जयपुर के कपिल सोनी ने 400 ग्राम चांदी का छत्र भगवान श्री महाकालेश्वर को अर्पित किया गया। जिसे गर्भगृह निरीक्षक कमल जोशी द्वारा प्राप्त कर दानदाता का सम्मान कर विधिवत रसीद प्रदान की गई।