- महाशिवरात्रि से पहले महाकाल दरबार में अंतरराष्ट्रीय पुष्प सज्जा की शुरुआत: 40 से अधिक विदेशी फूलों से सजेगा परिसर; बेंगलुरु से आए 200+ कलाकार तैयारियों में जुटे
- उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के विशेष पूजा-विधि: स्वस्ति वाचन के साथ खुले पट, राजा स्वरूप में सजा दरबार
- महाशिवरात्रि से पहले उज्जैन में हाई अलर्ट: देवास गेट से रेलवे स्टेशन तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन, 100 पुलिसकर्मी पांच टीमों में तैनात
- महाशिवरात्रि पर महाकाल दर्शन के लिए डिजिटल कंट्रोल रूम, गूगल मैप से तय होगा आपका रास्ता: जाम लगते ही मैप से गायब होगा रूट, खाली पार्किंग की ओर मोड़ दिया जाएगा ट्रैफिक
- महाकाल मंदिर में अलसुबह भस्मारती की परंपरा, वीरभद्र के स्वस्तिवाचन के बाद खुले चांदी के पट; पंचामृत अभिषेक और राजा स्वरूप में हुआ दिव्य श्रृंगार
नम आंखों से झरी बहादुरी की दास्तां
खाकी वर्दी के साथ वहां बैठे सभी लोग अपने आपको महफूज तो समझ ही रहे थे लेकिन पुलिस जवानों के शहादत से सभी की संवेदना झर रही थी। पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजन था पुलिस लाइन की स्मृति परेड का । आयोजन स्थल पर कलेक्टर संकेत भोडवे, डीआईजी राकेश गुप्ता के साथ उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल भी गणमान्यों शामिल थे। जैसे ही पुलिस लाइन में एडीजी व्ही. मधुकुमार पहुंचे तो वहां उन्हें सम्मान सैल्यूट दिया गया।
लाइन में आयोजित पुलिस शहीद स्मृति दिवस पर शोक शस्त्र की परंपरा निभाई गई, जवानों ने एक साथ शहीद स्मारक के समक्ष उन्हें सम्मान से सैल्यूट दिया। यहीं पर एसपी मनोहरसिंह वर्मा ने भी सभी वीर शहीद जवानों को सैल्यूट दिया और पुष्प चक्र अर्पित किया। यहां प्रज्जवलित अमर जवान ज्योति के सामने सम्मानगारक ने अपने शस्त्र उलटकर शहीदों के प्रति अपना आदर जाहिर किया। इस समय मार्मिक धुनों के बीच सभी की आंखें नम थीं। यहीं एडीजी मधुकुमार और एसपी मनोहरसिंह वर्मा ने अब तक शहीद हुए पुलिस जवानों के नामों का वाचन किया। इनमें से पांच जवान मध्यप्रदेश पुलिस से जुड़ हैं।
इसलिए मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस
१९५९ में जब सीआरपीएफ के जवान चीन और भारत की दुर्गम सीमा पर तैनात थे, तब चीन ने घात लगाकर २१ अक्टूबर की रात को हमला कर दिया इस दौरान पुलिस जवानों ने उनका जमकर सामना किया और लोहा लेते हुए अपना कैम्प नहीं छोड़ा। इस हमले में सीआरपीएफ के १० जवान शहीद हो गये। तभी से इस दिन देश भर में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाने लगा।