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नर्स-डॉक्टर सोते रहे, अस्पताल के गेट पर हाे गई डिलीवरी
उज्जैन | चरक अस्पताल के गेट पर गुरुवार रात 12.10 बजे तड़पकर एक महिला गिर गई। उसकी सहायता के लिए कोई कर्मचारी नहीं मिला। पति कर्मचारी को ढूंढने के लिए दौड़ा। इधर महिला का दर्द और बढ़ गया। पति किसी को लेकर आता इसके पहले जेठानी-ननद को डिलीवरी करानी पड़ी। महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। करीब आधे घंटे बाद पति एक बाई को लेकर लेकर आया और जैसे-तैसे जच्चा-बच्चा दोनों को लेबर रूम ले जाया गया।
काजीपुरा स्थित ग्यास का बाड़ा की नाजमीन पति शेरू को रात 11.45 बजे अचानक दर्द शुरू हो गया। वह गर्भवती थी। पति ने ऑटो बुलाया और उसे लेकर चरक अस्पताल पहुंचा। गेट नंबर एक बंद था। वहां कोई कर्मचारी भी नहीं था। गेट नंबर दो शिशु वार्ड की ओपीडी का गेट है। उसकी सीढ़िया चढ़ते समय नाजमीन की जैसे जान ही निकल गई थी। वह जोर से चीख पड़ी। आवाज सुनकर शेरू ने उसे भाभी और बहन के सुपुर्द किया और खुद कर्मचारी को किसी कर्मचारी की तलाश में दौड़ पड़ा। इधर उसने मुंह फेर ही था कि नाजमीन की चीत्कार और बढ़ गई। जेठानी और ननद ने ढांढस बंधाया लेेकिन इसी बीच वह एक बच्ची की मां बन गई थी। फर्श पर ही। ये कर्मचारियों के हड़ताल का असर था। वे अपनी मांगों के लिए काम बंद कर गए। फजीहत महिलाओं की हो रही है।
ये हैं अंबोदिया डेम निवासी राधाबाई। परिजन उन्हें गुरुवार सुबह 8 बजे डिलीवरी के लिए चरक अस्पताल लेकर आए। सुबह 9 बजे उसे लेबर रूम में ले जाया गया। परिजन बाहर इंतजार करते रहे। अंदर वह कराहती रही। डिलीवरी नहीं हुई। एक घंटे बाद उसे वापस वार्ड में पहुंचा दिया। दिनभर में ऐसा एक नहीं चार बार हुआ। महिला दिनभर तड़पती रही। ससुर और सास की अांखों से उस वक्त आंसू बह निकले जब रात 1 बजे अस्पताल कर्मचारियों ने साफ कह दिया या तो इसे इंदौर ले जाओ या जहां आपकी इच्छा हो, हम डिलीवरी नहीं करा सकते। उसे न रैफर करने के दस्तावेज दिए न ही कोई अब तक इलाज के कागज। अस्पताल के बाहर आए तो गेट पर एंबुलेेंस खड़ी थी। उन्होंने एंबुलेंस चालक के हाथ जोड़े-भैया कहीं भी ले चलो, जहां आप बोलेंगे वहां चलने को तैयार हैं लेकिन उसका कलेजा नहीं पसीजा। अंतत: परिजन उसे ऑटो में बैठाकर निजी अस्पताल ले गए।