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ब्लैक फंगस:नाक में आयुर्वेदिक तेल डालें, जड़ी-बूटियों का धुआं लें; जलोक थैरेपी भी करती है काम लेकिन अभी बंद है
ब्लैक फंगस से बचाव के लिए आयुर्वेद में भी उपाय सुझाव गए हैं। यह कि नाक में आयुर्वेदिक तेल डालें, जड़ी-बूटियों का धुआं भीतर खींचें और पत्तों व तेल की भाप लेते रहें। इससे फंगस टिक नहीं पाता व ग्रोथ करने की स्थिति में नहीं रहता है। कोरोना के साथ अब लोगों को ब्लैक फंगस ने भी परेशान कर रखा है। ऐसे में रोजाना आगर रोड स्थित शासकीय आयुर्वेद अस्पताल में भी इस बीमारी के मरीज पहुंचने लगे हैं। हालांकि यहां केवल प्राथमिक स्टेज वाले रोगियों काे ही इलाज किया जा रहा है। इनके अलावा इस बीमारी से बचाव के लिए टिप्स व दवाई मुहैया करवाई जा रही है।
शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय के एसोसिएट प्रो. डॉ मुकेश कुमार गुप्ता और असिस्टेंट प्रो. डॉ अनुभा जैन दोनों नाक-कान-गला विभाग में कार्यरत हैं। वे कहते हैं कि ब्लैक फंगस के औसतन चार-पांच मरीज रोज आ रहे हैं। जांच के बाद हम उन्हें स्पष्ट कर देते हैं कि यदि फंगस शरीर के यानी नाक या अन्य अंग के भीतर उतर गया है तो उसके लिए एलोपैथिक इलाज यानी ऑपरेशन ही जरूरी है। जबकि जिनमें इस बीमारी की शुरुआत ही है उसका हम आयुर्वेद में भी इलाज कर रहे हैं ताकि यह आगे नहीं बढ़े। इसके अलावा यह बीमारी नहीं हो, इससे बचाव के लिए लाेगों को आयुर्वेद दवाई दी जा रही है। डॉ. गुप्ता कहते हैं इस बीमारी में आयुर्वेद की जलोक थैरेपी से भी अच्छा आराम मिलता है लेकिन वह अभी यहां बंद है।
आयुर्वेद की नजर में ब्लैक फंगस : कारण, बचाव व इलाज का तरीका
मुख्य कारण : कोराना, कमजोर इम्युनिटी, स्टेरॉयड एवं एंटीबायोटिक का अधिक प्रयोग। शुगर से ग्रसित होने पर इसकी आशंका और बढ़ जाती है।
बचाव के लिए टिप्स : कोविड से ग्रस्त हो एलोपैथी के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधियों का जैसे अश्वगंधा, गुडुची, मधु यष्टि, त्रिकटु क्वाथ का प्रयोग करना चाहिए। रोगी को मधुमेह है तो इन औषधि के साथ वसंत कुसुमाकर रस, हल्दी, नीम चूर्ण, गुडुची सत्व का भी सेवन करना चाहिए।
ब्लैक फंगस हो जाए तो यह आयुर्वेद दवाई उपयोग व उपाय करें
1- स्थानिक चिकित्सा : नमक के पानी से जल नेति करनी चाहिए। यानी नमक के गुनगुने पानी से नाक की सफाई करना चाहिए।
2- नस्य : अणु तेल, कासीसादी तेल, क्षार तेल का प्रयोग डॉक्टर की सलाह पर करें। इन तेल को नाक में ड्राप की तरह डालना है।
3- धूम्र : गूगल, मरीच, हरिद्रा, सर्जरस से धूम्रपान करना चाहिए। यानी इन्हें जलाकर धुआं नाक के जरिए शरीर में लेना है।
4- गर्म पानी में : नीलगिरी का तेल या इसके पत्ते डालकर भाप का भी प्रयोग करना चाहिए। जिस तरह भाप ली जाती है।
यह भी करें : शिवा गुटिका, कैशोरगुगल, गंधक रसायन, रसमाणिक्य, गुडुची सत्व, पंच तिक्त घृत गुगल, मजिष्ठा, तालकेश्वर रस आदि का प्रयोग डॉक्टर की सलाह पर करें।