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आज महाकाल गर्भगृह में किसी वीआईपी को प्रवेश नहीं
उज्जैन:आज भगवान महाकालेश्वर के दरबार में प्रशासनिक आदेश से सुबह भस्मार्ती के बाद किसी को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया गया। खास बात यह कि वीआईपी और प्रोटोकॉल से आने वालों को भी नंदी हॉल से दर्शन कराये गये। इधर पुलिस व प्रशासन द्वारा भगवान महाकालेश्वर की शाही सवारी के लिये तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सवारी में भगवान अपने भक्तों को आज छह स्वरूपों में दर्शन देंगे।
सोमवार होने के साथ ही आज भगवान महाकालेश्वर की शाही सवारी भी निकलने वाली है। शहर में हजारों लोगों ने भगवान के दर्शनों और सवारी में शामिल होने के लिये डेरा डाला है। महाकालेश्वर मंदिर में भी भक्तों की खासी भीड़ है। इसी के चलते मंदिर के समस्त कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि गर्भगृह में किसी भी व्यक्ति का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। सिर्फ अधिकृत पुजारी भगवान की आरती व पूजन के लिये प्रवेश करेंगे। इसी के चलते भस्मार्ती सम्पन्न होने के बाद मंदिर के गर्भगृह में किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया गया।
इनमें वह लोग भी शामिल हैं जो वीआईपी, प्रोटोकॉल, पण्डे पुजारियों के यजमान के रूप में गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। खास बात यह कि सुबह वीआईपी के लिये विशेष दर्शन व्यवस्था के अंतर्गत तय किये गये 1 घंटे के समय में भी गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया गया। मंदिर प्रबंध समिति के अधिकारियों का कहना है कि दोपहर के समय में आज विशेष सुविधा नहीं दी जायेगी।
आम श्रद्धालुओं को सुविधा
महाकाल मंदिर गर्भगृह में वीआईपी, प्रोटोकॉल, पण्डे पुजारियों के यजमानों द्वारा प्रवेश किये जाने के दौरान आम श्रद्धालुओं को रेलिंग से भगवान के दर्शनों में असुविधा होती थी। आज सुबह से विशेष सुविधा प्राप्त लोगों को नंदीगृह में बैठाकर दर्शन कराये गये। गर्भगृह में सिर्फ एक पुजारी बैठे थे और रेलिंग से आम श्रद्धालुओं ने भगवान के आसानी से दर्शन किये। श्रद्धालुओं ने व्यवस्था की तारीफ भी की। श्रद्धालुओं ने चर्चा में कहा कि महाकाल के दरबार में कोई वीआईपी नहीं, सब एक समान हैं।
यह सवारी देखने की व्यवस्था
लगातार बैठकों के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा शाही सवारी देखने और भगवान के दर्शनों के लिये श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुसार व्यवस्था की है, जिसके अंतर्गत महाकालेश्वर मंदिर से पालकी रामघाट के लिये रवाना होने के दौरान गुदरी से आगे बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामानुजकोट तक सड़क के दोनों ओर गलियों के मुहाने पर बेरिकेड्स लगाये गये हैं जबकि सड़क किनारे कोई बेरिकेडिंग नहीं है। आम श्रद्धालु घरों के ओटले पर खड़े होकर सवारी देख सकते हैं। रामघाट से गणगौर दरवाजे तक सड़क के दोनों ओर बेरिकेड्स लगे हैं। कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर, ढाबारोड़, गेबी साहब, लोहे की टंकी तक सिर्फ गलियों के मुहाने पर बेरिकेड्स लगे हैं। बीच रोड़ पर किसी प्रकार की बेरिकेटिंग नहीं है। यहां पुलिसकर्मी तीन लेयर में भीड़ प्रबंधन की कमान संभालेंगे।
इस बार श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान
लोहे की टंकी, खाराकुआं थाना, मिर्जा नईमबेग मार्ग, तेलीवाड़ा, कंठाल तक सड़क के दोनों ओर 7 फीट ऊंचे बेरिकेड्स लगे हैं लेकिन महिलाओं, बच्चों और वृद्धों के लिये पुलिस प्रशासन ने इस बार विशेष ध्यान रखा है। प्रत्येक बेरिकेड्स के बीच में करीब 8-10 फीट लंबे तीन पाइपों को तार से बांधा गया
है, जबकि पिछले वर्षों तक पूरे मार्ग पर ऊंचे ऊंचे बेरिकेड्स बांधे गये थे और उक्त लोग सवारी के आसानी से दर्शन नहीं कर पाये थे।
दो हजार पुलिसकर्मी
शाही सवारी के दौरान भीड़ नियंत्रण, भजन मंडलियों व अखाड़ों को आगे बढ़ाने से लेकर सारी व्यवस्थाओं के लिये सशस्त्र पुलिस कर्मियों के अलावा होमगार्ड, नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों, स्काउट की सेवाएं ली जाएंगी। खास बात यह कि सवारी के लिये दो हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
सुरक्षा व भीड़ नियंत्रण मुख्य उद्देश्य
श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण हमारा मुख्य उद्देश्य है। शाही सवारी में महिलाओं, बच्चों और वृद्धों को आसानी से दर्शन हों, इसलिये बड़े बेरिकेड्स के बीच लोहे की पाइप बांधे हैं। दो हजार पुलिस अधिकारी और जवान तैनात रहेंगे। रामघाट पर पालकी के लिये कॅरीडोर बनाया है।
सचिन अतुलकर, पुलिस अधीक्षक