- सिंहस्थ के लिए पुलिस को तैयार कर रहा प्रशासन: उज्जैन में पुलिस अफसरों की 21 दिन की खास ट्रेनिंग शुरू, 41 विषयों पर रहेगा फोकस; 117 अधिकारी बनेंगे “मास्टर ट्रेनर”
- उज्जैन में भस्म आरती में शामिल हुए बिहार के पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा: नंदी हॉल में बैठकर किए दर्शन, महाकाल से मांगा आशीर्वाद
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: त्रिपुण्ड, त्रिशूल और डमरू से सजे बाबा, गूंजी ‘जय श्री महाकाल’
- उज्जैन में तपिश का प्रकोप: 40-41°C पर अटका पारा, अगले 4 दिन में और बढ़ेगी गर्मी; स्वास्थ्य विभाग सतर्क, हीट मरीजों के लिए विशेष वार्ड तैयार
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर सख्ती: मुख्य सचिव ने कहा—समय से पहले पूरे हों काम, बारिश से पहले बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करें; मेडिसिटी, सड़क और पुल निर्माण की भी समीक्षा की
राष्ट्रीय स्तर के मैच पर मिलते है सिर्फ 200 से 500 रु.
उज्जैन-भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी व्हील चेयर पर तिरंगा लगाकर 250 किलोमीटर की यात्रा तय कर उज्जैन पहुंचे। इनका उद्देश्य दिव्यांगजनों को प्रेरित करना और शासन द्वारा मदद के लिये ध्यान आकर्षित करना है। इन खिलाडिय़ों ने रामघाट पहुंचकर शिप्रा में स्नान किया और महाकालेश्वर दर्शन के लिये रवाना हुए। वे बोले- राष्ट्रीय स्तर के मैच खेलने पर भी सिर्फ 200 से 500 रुपए ही मिलते है।
शैलेन्द्र यादव निवासी कोलार रोड़ भोपाल और कमल हसन निवासी रूद्रपुर उत्तराखंड भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के खिलाड़ी हैं। जन्म के बाद 6 और 11 माह की उम्र पोलियो के कारण पैरों से दिव्यांग हुए खिलाडिय़ों ने अपने हौंसले से इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना स्थान बनाया। शैलेन्द्र ने बताया कि भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम की तरफ से वह नेपाल, बंगलादेश में खेलकर आ चुके हैं।
म.प्र. दिव्यांग क्रिकेट टीम में शामिल होकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले अनेक टूर्नामेंट में भाग लिया है, जबकि कमल हसन भी पिछले कुछ माह से क्रिकेट खेल रहे हैं। शैलेन्द्र ने बताया कि दिव्यांगजनों को मानसिक रूप से कमजोर न होने की प्रेरणा देने के लिये व्हीलचेयर पर उज्जैन तक यात्रा का निर्णंय लिया। सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली जिसे पढ़कर कमल हसन उनसे जुड़े और उत्तराखंड से भोपाल आये।
यहां से 11 नवंबर को दोनों ने व्हीलचेयर पर उज्जैन के लिये यात्रा शुरू की। हसन ने बताया सरकार की तरफ से मदद नहीं मिलती। दिव्यांगता पेंशन के नाम पर सिर्फ एक हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं । राष्ट्रीय स्तर पर खेले, मैच जीतने के बाद 200-500 रुपये मिल जाते हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम की तरह न तो प्रशंसा मिलती है और न कोई मदद के लिये आगे आता है।