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सूना हो गया भीड़ से खचाखच भरा रहने वाला बाबा महाकाल का दरबार
Ujjain News: दिनभर पसरा रहा सन्नाटा, इक्का-दुक्का लोग पहुंचे दर्शन करने, जिन्हें वीआईपी गेट से दिया प्रवेश
कोरोना वायरस के चलते राजाधिराज भगवान महाकाल का दरबार सूना हो गया। आम दिनों में भीड़ से खचाखच भरे रहने वाले मंदिर में मंगलवार को दिनभर सन्नाटा रहा। कोरोना के भय व सुरक्षा के बीच भक्त ही नहीं यहां के पुजारी-पुरोहित भी अधर में लटके नजर आ रहे हैं। यजमान नहीं आने से उनकी आमदनी भी शून्य हो गई। इक्का-दुक्का लोग ही दर्शन करने आए, जिन्हें वीआईपी गेट से ही प्रवेश दिया गया।
आम और वीआईपी के प्रवेश पर प्रतिबंध
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के दु:ष्प्रभाव से बचने और सुरक्षा की दृष्टि से महाकाल मंदिर समिति ने 16 मार्च से भस्म आरती में आम और वीआईपी के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो मंगलवार से लागू हो गया। वहीं इससे बचाव के लिए मंदिर की नि:शुल्क भोजनशाला व दोनों धर्मशालाओं में बुकिंग बंद कर दी गई है। मंदिर के सभी प्रवेश द्वार पर श्रद्धालुओं को प्रवेश के दौरान सेनिटाइजर से हाथ धुलवाए जा रहे हैं। मंदिर में सभी कर्मचारी, अधिकारी और पुजारी-पुरोहितों को मॉस्क व दस्ताने पहनने को कहा है। यह क्रम 31 मार्च तक जारी रहेगा।
मंदिर पहुंचे विदेश भक्त, बनी संशय की स्थिति
महाकाल मंदिर में मंगलवार को करीब 1.30 बजे विदेशी श्रद्धालुओं के आने पर संशय की स्थिति बन गई। गेट पर मौजूद गार्ड ने उन्हें रोका और बैंच पर बैठा दिया, उसने अधिकारी को उनके आने की सूचना दी। अधिकारी ने उन्हें बिना जांचे ही मंदिर में जाने दिया। क्योंकि उनके पास उस समय तक लेजर थर्मामीटर गन उपलब्ध नहीं थी। प्रशासक एसएस रावत ने बताया 4 थर्मामीटर स्कैन गन शाम 5.30 बजे इंदौर से आ चुकी हैं। बुधवार से प्रत्येक श्रद्धालु की जांच होगी, इसके बाद ही अंदर प्रवेश दिया जाएगा।
मंदिर कर्मचारियों को देंगे थर्मामीटर गन की ट्रेनिंग
प्रशासक रावत ने बताया कि मंदिर के कर्मचारियों को थर्मामीटर लेजर गन की ट्रेनिंग दी जाएगी। जिससे वे हर आने वाले श्रद्धालु के शरीर का सामान्य व बढ़ा हुआ तापमान जांचेंगे। सामान्य तापमान होने पर ही उन्हें अंदर जाने दिया जाएगा। यदि उनके शरीर का तापमान अधिक निकलता है, तो उन्हें तुरंत चिकित्सालय भेजा जाएगा। दोपहर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनुसुईया गवली सिन्हा ने मंदिर का दौरा किया और उपस्थित कर्मचारियों व परिसर में मौजूद चिकित्सा टीम को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।