उज्जैन को मिला अत्याधुनिक ‘सम्राट विक्रमादित्य-द हेरिटेज होटल’, एआई तकनीक से होगा संचालन; राज्यपाल मंगु भाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फीता काटकर किया उद्घाटन

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों की गाथा में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए, उज्जैन की पवित्र भूमि पर ‘सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज’ का भव्य शुभारंभ किया गया। यह अवसर न केवल उज्जैन के ऐतिहासिक गौरव को पुनर्जीवित करने का था, बल्कि यह इस बात का भी प्रतीक था कि भारत अपनी प्राचीन विरासत को सहेजते हुए आधुनिकता की ओर अग्रसर हो रहा है।
बता दें, यह होटल न केवल अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण विशिष्ट है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक और परंपरा का अनूठा समावेश भी किया गया है। महाकाल मंदिर के बिल्कुल समीप स्थित ‘महाराजवाड़ा द हेरिटेज’ होटल से श्रद्धालु अपने कमरों और रूफटॉप रेस्तरां से ही महाकाल मंदिर के पावन शिखर के दर्शन कर सकेंगे, जिससे यह स्थान आध्यात्मिक और ऐतिहासिक रूप से और भी महत्वपूर्ण बन जाता है।
इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बने मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगु भाई पटेल, जिन्होंने इस ऐतिहासिक पहल की सराहना करते हुए कहा, “जहां स्वयं महाकाल विराजमान हैं, जहां कालिदास की अमर कृतियों ने जन्म लिया, और जहां सम्राट विक्रमादित्य ने न्याय की आधारशिला रखी— उस पुण्य भूमि पर आज इतिहास में एक और महत्वपूर्ण पृष्ठ जुड़ रहा है। ‘सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज’ का शुभारंभ उज्जैन की ऐतिहासिक धरोहर को एक नई पहचान देगा और इसे विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करेगा।”
इस भव्य आयोजन में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय विधि एवं न्याय और संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार, क्षेत्रीय सांसद अनिल फिरोजिया, क्षेत्रीय विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, और अनेक नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विरासत से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आज का यह शुभ अवसर हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य का निर्माण करना चाहिए। सम्राट विक्रमादित्य का शासनकाल रामराज्य की तरह था— न्याय, परंपरा, और संस्कृति का संगम। इसी भाव को पुनः स्थापित करने के लिए आज यह हेरिटेज समर्पित किया जा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि 1235 ईस्वी में जब दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने उज्जैन और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों को नष्ट कर दिया था, तब इस प्राचीन नगरी की सांस्कृतिक विरासत को गहरा आघात पहुँचा। लेकिन मराठा योद्धाओं— विशेष रूप से छत्रपति शिवाजी और महाराज सिंधिया— के शासनकाल में उज्जैन की ऐतिहासिक भव्यता को पुनः स्थापित किया गया। आज ‘सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज’ उसी ऐतिहासिक पुनर्जागरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
समारोह की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, परंपरागत पूजा-अर्चना, और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके उपरांत, राज्यपाल मंगु भाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फीता काटकर हेरिटेज का उद्घाटन किया और इस ऐतिहासिक धरोहर के विभिन्न कक्षों का अवलोकन किया।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारत का इतिहास केवल युद्धों और राजवंशों का इतिहास नहीं, बल्कि यह ज्ञान, न्याय, और सांस्कृतिक उत्थान का इतिहास है। उन्होंने उल्लेख किया कि राजस्थान के बीकानेर जिले के भीकमपुर में भी एक विशाल महल स्थित है, जो विक्रमादित्य कालीन प्रतीत होता है और इस पर गहन शोध किया जाना चाहिए।
मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा ₹17.90 करोड़ की लागत से निर्मित इस हेरिटेज केंद्र को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इसका उद्देश्य न केवल पर्यटकों को उज्जैन के गौरवशाली अतीत से परिचित कराना है, बल्कि उन्हें एक ऐसा अनुभव प्रदान करना है, जहाँ वे इतिहास को साक्षात महसूस कर सकें।
इतिहास से आधुनिकता की ओर – महाराजवाड़ा का अनूठा रूपांतरण
महाकाल मंदिर के समीप स्थित यह भवन कोई आम होटल नहीं है। यह वही ऐतिहासिक इमारत है, जहां कभी महाराजवाड़ा स्कूल संचालित किया जाता था। स्कूल को स्थानांतरित किए जाने के बाद, मध्यप्रदेश टूरिज्म और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के सहयोग से इस 5000 वर्गफीट परिसर में स्थित 2500 वर्गफीट की ऐतिहासिक इमारत को संजोते हुए इसे हेरिटेज होटल का रूप दिया गया। इसके पुनर्निर्माण में मराठा स्थापत्य कला का विशेष ध्यान रखा गया है, जिससे यह भवन अपनी प्राचीन भव्यता को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त हो गया है।
‘महाराजवाड़ा द हेरिटेज’ होटल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक शानदार और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने के लिए सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यह होटल पूरी तरह से हाईटेक ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिससे यहां आने वाले मेहमानों को विश्वस्तरीय अनुभव मिलेगा। होटल के इंटीरियर को पूरी तरह से ऐतिहासिक और पारंपरिक स्वरूप दिया गया है, जिसमें हैंड वर्क नक्काशी, राजस्थानी महंगे पत्थर, उच्च गुणवत्ता का मार्बल, झूमर, भव्य दरवाजे और सोफे शामिल हैं।
विशेष रूप से होटल में वैदिक घड़ी लगाई गई है, जो भारतीय कालगणना के अनुसार समय बताती है। यह घड़ी आधुनिक डिजिटल घड़ियों से भिन्न है और प्राचीन भारतीय समय प्रणाली को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
होटल में 9 सुइट रूम, 6 डीलक्स रूम और 2 सुपर डीलक्स रूम बनाए गए हैं। प्रत्येक कमरा न केवल भव्य और आरामदायक है, बल्कि इनका इंटीरियर भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष अनुभव – महाकाल के सान्निध्य में ठहरने का अवसर
इस हेरिटेज होटल का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसमें ठहरने वाले श्रद्धालु अपने कमरों से ही महाकाल मंदिर के शिखर दर्शन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, होटल के रूफटॉप रेस्तरां से भी भक्तजन महाकाल मंदिर का दिव्य दृश्य निहार सकते हैं। यह स्थान उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगा जो महाकाल की नगरी में ठहरकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करना चाहते हैं।
होटल के लोकार्पण के बाद इसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। कोई भी श्रद्धालु यहां ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बुकिंग कर सकता है। होटल में ठहरने की दरें ₹7,280 से ₹35,990 तक रखी गई हैं, जो कमरे की श्रेणी और सुविधाओं के अनुसार निर्धारित की गई हैं।
इस हेरिटेज केंद्र में कला, साहित्य, चिकित्सा, भोजन, और आध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहाँ की प्रमुख सुविधाएँ इस प्रकार हैं—
- महाराजवाड़ा – फाइन डाइन रेस्टोरेंट: प्राचीन भारतीय स्थापत्य शैली में बना यह भोजनालय स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद प्रदान करेगा।
- कैलाश – रूफटॉप रेस्टोरेंट: आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह रेस्तरां पर्यटकों को उज्जैन के खूबसूरत दृश्यों के साथ भोजन का आनंद लेने का अवसर देगा।
- महानस – ओल्ड वाड़ा रेस्टोरेंट: यह रेस्टोरेंट पारंपरिक भोजन परोसने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है।
- सूत्रधार – रिसेप्शन और लॉबी: एक भव्य स्वागत कक्ष, जहाँ आगंतुकों का पारंपरिक रूप से स्वागत किया जाएगा।
- अशोक मंडप – वीआईपी लॉबी: विशिष्ट अतिथियों और शोधकर्ताओं के लिए एक विशेष सभा कक्ष।
- धन्वंतरि पंचकर्म केंद्र: आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धि का अनुभव प्रदान करने वाला केंद्र।
- अमरकोष – लाइब्रेरी: यह ग्रंथालय उन विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए एक खजाना होगा, जो भारतीय इतिहास, न्याय प्रणाली, और संस्कृति पर शोध करना चाहते हैं।
- भर्तृहरि वीथिका – आर्ट गैलरी: भारतीय चित्रकला, शिल्पकला, और ऐतिहासिक धरोहर को प्रदर्शित करने वाली एक समर्पित वीथिका।
- कुमुद्वती – सॉविनियर शॉप: पर्यटक यहाँ से स्मृति चिह्न और स्थानीय कला से जुड़ी वस्तुएँ खरीद सकते हैं।
- गार्डन, लैंडस्केपिंग और पार्किंग: हेरिटेज स्थल को पर्यटकों के लिए अधिक सुंदर और सुविधाजनक बनाने हेतु विशेष प्रबंध।