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साल में सिर्फ एक बार! आज विजया दशमी पर बाबा की राजसी सवारी ने नए शहर को किया धन्य, दशहरा पर महाकाल निकले नगर भ्रमण पर; हजारों श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन। विजयादशमी के पावन अवसर पर गुरुवार, 2 अक्टूबर की शाम पूरे शहर ने भगवान महाकाल के अद्भुत और भव्य स्वरूप के दर्शन किए। परंपरा के अनुसार साल में केवल एक बार दशहरा पर्व पर राजाधिराज श्री महाकाल अपनी सवारी के साथ नए शहर के भ्रमण पर निकलते हैं और भक्तों को दर्शन का सौभाग्य प्रदान करते हैं।
शाम चार बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने विधिविधान से पूजन-अर्चन किया। इसके बाद चांदी की पालकी में विराजमान भगवान महाकाल राजसी वैभव और अद्भुत शाही अंदाज के साथ दशहरा मैदान की ओर रवाना हुए। मंदिर परिसर से निकलते ही सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने राजाधिराज को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी।
पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
सवारी मार्ग पर भक्तों का उत्साह देखने लायक था। जगह-जगह मंच सजाकर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की और बाबा के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। पुलिस बैंड, घुड़सवार दल, मंदिर के पुजारी और हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक यात्रा का हिस्सा बने।
शमी पूजन और दशहरा मैदान पर विशेष अनुष्ठान
सवारी शहर के प्रमुख मार्गों—महाकाल घाटी, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, छोटा सराफा, सती गेट, कंठाल, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवास गेट, चामुंडा माता चौराहा, फ्रीगंज टावर चौक होते हुए दशहरा मैदान पहुंची। यहां रावण दहन से पहले भगवान महाकाल का शमी पूजन संपन्न हुआ। शमी वृक्ष की पूजा को विजय और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसलिए यह अनुष्ठान विशेष महत्व रखता है।
वापसी का मार्ग
पूजन-अर्चन के बाद सवारी पुनः मंदिर की ओर रवाना हुई। वापसी का मार्ग दशहरा मैदान से श्रीगंगा होटल के समीप वाले मार्ग से होते हुए देवास रोड, तीन बत्ती चौराहा, माधव क्लब रोड, धन्नालाल की चाल, लोक निर्माण विभाग कार्यालय, फ्रीगंज ओवरब्रिज, संख्याराजे धर्मशाला, देवास गेट, मालीपुरा, दौलतगंज चौराहा, इंदौर गेट, गदापुलिया, हरिफाटक ओवरब्रिज और बेगमबाग से होकर कोट मोहल्ला चौराहे के रास्ते पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।
19 किलोमीटर का दिव्य सफर
करीब 19 किलोमीटर लंबे इस दिव्य यात्रा मार्ग पर भक्तों ने सवारी का उत्साह और श्रद्धा से स्वागत किया। रात्रि में जब सवारी पुनः मंदिर लौटी तो पूरा शहर भक्तिरस में डूबा हुआ था। दशहरा पर्व पर राजाधिराज महाकाल की यह भव्य सवारी न केवल उज्जैन बल्कि पूरे प्रदेश के लिए आस्था और परंपरा का अनुपम प्रतीक है।