उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 की शुरुआत: महाशिवरात्रि से 19 मार्च तक चलेगा सांस्कृतिक महापर्व, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया उद्घाटन; ‘शिवोह्म’ संगीत संध्या से सजी पहली शाम

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:

उज्जैन में रविवार से विक्रमोत्सव 2026 का विधिवत शुभारंभ हो गया। महाशिवरात्रि के अवसर पर आरंभ हुआ यह महोत्सव 19 मार्च तक चलेगा। पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन की शुरुआत की।

पहली ही शाम प्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम की ‘शिवोह्म’ संगीत संध्या ने माहौल को आध्यात्मिक और ऊर्जावान बना दिया। मंच पर शिव धुनों के साथ युवा दर्शक झूमते नजर आए। प्रीतम ने उज्जैन आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे पहली बार यहां आए हैं। उन्होंने ‘इलाही मेरा दिल आहे आहे’ गीत से प्रस्तुति की शुरुआत की और इसके बाद भक्ति व बॉलीवुड मिक्स गीतों की श्रृंखला से श्रोताओं का मन मोह लिया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 1 करोड़ 1 लाख रुपये का अंतरराष्ट्रीय विक्रमादित्य सम्मान, 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और 5-5 लाख रुपये के तीन राज्य स्तरीय सम्मान प्रदान किए।

इस महोत्सव में कलश यात्रा, भारतीय परंपरा पर आधारित प्रदर्शनी और ‘शिवोह्म’ संगीत संध्या जैसे प्रमुख आयोजन शामिल हैं। संस्कृति, अध्यात्म और व्यापार—तीनों के समन्वय के साथ यह उत्सव 15 फरवरी से 19 मार्च 2026 तक चलेगा। आयोजन की तैयारियां मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग, विक्रमादित्य शोधपीठ और जिला प्रशासन ने मिलकर पूरी की हैं।

विक्रम व्यापार मेला 2026 का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने विक्रम व्यापार मेला 2026 का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया, नगर निगम सभापति कलावती यादव, विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और महापौर मुकेश टटवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मेले में चार पहिया वाहनों के 123 स्टॉल, दोपहिया वाहनों के 40 स्टॉल और लगभग 60 फूड स्टॉल लगाए गए हैं। कुल मिलाकर 223 दुकानें संचालित हो रही हैं। राज्य सरकार ने मेले के दौरान खरीदे जाने वाले वाहनों पर 50% तक मोटरयान कर (रोड टैक्स) में छूट स्वीकृत की है।

कलेक्टर रोशन सिंह के अनुसार यह मेला खरीदारों और डीलरों दोनों के लिए लाभकारी रहेगा। वर्ष 2024 में 23,705 और 2025 में 36,223 वाहन बिके थे। इस बार इससे अधिक बिक्री का अनुमान जताया गया है।

सुबह शासकीय कन्या महाविद्यालय से शोधपीठ कार्यालय तक कलश यात्रा निकाली गई। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ कार्यालय परिसर, विक्रम भवन और कालिदास अकादमी परिसर में विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ।

प्रदर्शनी में विक्रमादित्य और अयोध्या, आर्य भारत, महाभारत कालीन अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह, 84 महादेव, जनजातीय देवलोक, श्रीकृष्ण प्रभात और रागमाला जैसे विषयों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

इस बार प्रदर्शनी में महाभारत पर आधारित एक विशेष खंड जोड़ा गया है। उज्जैन में इस प्रकार की प्रस्तुति पहली बार लगाई गई है। इसमें युद्ध व्यूहों के मॉडल और महाभारत काल से जुड़े अस्त्र-शस्त्रों की प्रतिकृतियां विस्तृत जानकारी के साथ प्रदर्शित की गई हैं।

आयोजकों के अनुसार यह खंड दर्शकों को उस युग की सैन्य संरचना और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझने का अवसर प्रदान करता है। विक्रमोत्सव 2026 के साथ उज्जैन में एक बार फिर सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और व्यापारिक गतिविधियों का व्यापक संगम देखने को मिल रहा है।

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