महाअष्टमी पर महामाया मंदिर से शुरू हुई नगर पूजा: 28 किमी तक चली मदिरा की धारा, संत-महंतों की रही मौजूदगी; श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:

उज्जैन में चैत्र नवरात्रि के महाअष्टमी पर्व पर गुरुवार को परंपरा, आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी पारंपरिक नगर पूजा का आयोजन विधि-विधान के साथ किया गया। सुबह सबसे पहले 24 खंबा क्षेत्र स्थित माता महामाया और महालया माता मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई, जहां देवी को मदिरा का भोग अर्पित कर नगर पूजा की शुरुआत की गई। इसके बाद धार्मिक विधियों के बीच नगर पूजा यात्रा रवाना हुई।

इस आयोजन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत अरविंद पुरी महाराज की विशेष उपस्थिति रही। उनके साथ कई प्रमुख संत-महंत, महामंडलेश्वर और विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक अनुशासन और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यह आयोजन और भी भव्य नजर आया।

नगर पूजा यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए लगभग 28 किलोमीटर तक निकाली जा रही है। यात्रा की खास परंपरा के तहत कोटवार द्वारा हांडी में मदिरा लेकर पूरे मार्ग में चलना प्रमुख आकर्षण रहा। यात्रा के दौरान जिन-जिन स्थानों से जुलूस गुजरा, वहां स्थित देवी और भैरव मंदिरों में ध्वज अर्पित किए गए, साथ ही कई स्थानों पर माता को मदिरा का भोग भी लगाया गया। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और “जय माता दी” के जयकारों के बीच श्रद्धालु बड़ी संख्या में इस यात्रा में शामिल हुए और भक्ति भाव से सहभागी बने।

अखाड़ा परिषद से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार यह नगर पूजा वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसे हर परिस्थिति में निभाया जाता रहा है। यहां तक कि कोरोना काल के दौरान भी इस परंपरा को प्रतीकात्मक रूप से जारी रखा गया था, जो इसकी धार्मिक महत्ता को दर्शाता है।

यात्रा के समापन के बाद बड़नगर रोड स्थित अखाड़ा परिसर में कन्या पूजन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विधि-विधान से बालिकाओं का पूजन कर उन्हें प्रसाद वितरित किया जाएगा। इसके साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया है, जिसमें संत-महंतों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आम श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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