उज्जैन में सिंहस्थ कार्यों का ग्राउंड रिव्यू: संत बोले- व्यवस्था विश्वस्तरीय होनी चाहिए, अधिकारियों संग किया निरीक्षण

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:

उज्जैन में आगामी सिंहस्थ मेले की तैयारियों को लेकर गुरुवार को साधु-संतों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विभिन्न निर्माण कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि संतों ने जमीनी स्तर पर चल रहे कामों को देखा-परखा और अपनी राय भी रखी। निरीक्षण की शुरुआत शनि मंदिर क्षेत्र से हुई, जहां क्षिप्रा नदी किनारे बनाए जा रहे नए घाटों का अवलोकन किया गया। इसके बाद संतों का दल कान्ह नदी डायवर्जन परियोजना, टनल निर्माण कार्य और वाकणकर ब्रिज तक पहुंचा, जहां अधिकारियों ने उन्हें प्रोजेक्ट की प्रगति और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह पूरे समय संतों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने क्षिप्रा शुद्धिकरण योजना, कान्ह नदी डायवर्जन और सिंहस्थ से जुड़े अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान रामादल अखाड़ा परिषद के रामेश्वर दास, बड़ा उदासीन अखाड़े के महंत सत्यानंद जी, निर्मोही अखाड़ा के भगवान दास जी, महावीर दास जी महाराज, चरणदास जी, महेश दास जी, दिग्विजय दास जी और राजीव लोचन दास जी सहित कई प्रमुख संत उपस्थित रहे, जिससे इस निरीक्षण को धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व मिला।

घाट निर्माण कार्य को लेकर संतों ने संतोष व्यक्त किया। बड़ा उदासीन अखाड़े के महंत सत्यानंद महाराज ने बताया कि अधिकारियों के अनुसार अब तक करीब 42 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे वैश्विक स्तर के आयोजन में व्यवस्थाएं भी उसी स्तर की होनी चाहिए। खासतौर पर आम श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घाटों पर विशेष व्यवस्थाएं जरूरी हैं। इसी दिशा में तीन प्रमुख घाटों पर व्हीलचेयर की व्यवस्था की जा रही है, ताकि दिव्यांग और वृद्ध श्रद्धालु भी आसानी से स्नान कर सकें।

अखाड़ा परिषद से जुड़े आंतरिक मुद्दों पर भी संतों ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। महंत सत्यानंद महाराज ने कहा कि देशभर में 13 अखाड़े हैं और उनमें समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी पंच परमेश्वर की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ जैसे आयोजन में किसी एक व्यक्ति का वर्चस्व नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता ही अहम है। संतों का दृष्टिकोण व्यापक होता है, इसलिए वे अनावश्यक विवादों से दूर रहकर सकारात्मक भूमिका निभाना चाहते हैं।

निरीक्षण के अंत में संतों का दल वाकणकर ब्रिज पहुंचा और वहां चल रहे निर्माण कार्यों को देखा। इसके बाद हरी फाटक ब्रिज के पास स्थित पार्किंग स्थल पर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने सभी संतों का सम्मान किया। उन्होंने फूल-माला, शॉल और श्रीफल भेंट कर आभार व्यक्त किया। कलेक्टर ने कहा कि सिंहस्थ से जुड़े लगभग 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है और संतों के सुझाव प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन सुझावों को प्राथमिकता के साथ अमल में लाया जाएगा, ताकि सिंहस्थ 2028 का आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सहज अनुभव वाला बन सके।

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