- पंचकोशी यात्रा 12 अप्रैल से: 2 दिन पहले ही उज्जैन पहुंचने लगे श्रद्धालु, हर साल 2-3 लाख की भागीदारी
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार, गूंजी ‘जय श्री महाकाल’
- उज्जैन में सिंहस्थ कार्यों का ग्राउंड रिव्यू: संत बोले- व्यवस्था विश्वस्तरीय होनी चाहिए, अधिकारियों संग किया निरीक्षण
- Ujjain Mahakal Bhasma Aarti: रजत मुकुट में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती में पहुंचे सितारे: सुनील जोशी, किंजल दवे, मोनल गज्जर और उल्का गुप्ता ने किए दर्शन, जल अर्पित कर लिया आशीर्वाद!
पंचकोशी यात्रा 12 अप्रैल से: 2 दिन पहले ही उज्जैन पहुंचने लगे श्रद्धालु, हर साल 2-3 लाख की भागीदारी
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में पंचकोशी यात्रा शुरू होने में अभी दो दिन बाकी हैं, लेकिन शहर में श्रद्धालुओं की आवाजाही तेज हो गई है। 118 किलोमीटर लंबी इस यात्रा के लिए लोग 12 अप्रैल से पहले ही पहुंचना शुरू हो गए हैं। परंपरा के मुताबिक यात्रा की शुरुआत नागचंद्रेश्वर मंदिर से होती है, जहां श्रद्धालु नारियल चढ़ाकर भगवान से सफल यात्रा की कामना करते हैं। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है।
हर साल करीब 2 से 3 लाख श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं और इस बार भी वैसा ही माहौल बनता नजर आ रहा है। इंदौर, बड़नगर, इंगोरिया और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग उज्जैन पहुंच रहे हैं। कुछ लोग पहली बार इस यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं, वहीं कई ऐसे भी हैं जो हर साल इस परंपरा को निभाते हैं। नागचंद्रेश्वर मंदिर से जुड़ी शीला शर्मा के मुताबिक, यात्रा का यह उत्साह हर साल एक जैसा ही रहता है और लाखों लोग इसमें शामिल होते हैं।
इस बार खास बात यह है कि युवाओं की भागीदारी भी काफी बढ़ी है। कई छात्र-छात्राओं ने तय किया है कि वे यात्रा के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखेंगे। उनका कहना है कि वे इस समय को पूरी तरह भक्ति और आत्मिक अनुभव के लिए देना चाहते हैं। एक छात्रा, जो 11वीं में पढ़ती है, पहली बार यात्रा कर रही है। उसने बताया कि वह फोन सिर्फ घरवालों से संपर्क के लिए ही इस्तेमाल करेगी।
यात्रा में परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी अच्छी-खासी है। करौंदिया गांव से आई मनीषा भाटी अपने परिवार के साथ पहली बार इस यात्रा में शामिल हो रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दादी पहले कई बार यह यात्रा कर चुकी हैं, जिससे उन्हें भी प्रेरणा मिली। वहीं, राज कुंवर बाई पिछले तीन साल से लगातार इस यात्रा का हिस्सा बन रही हैं और हर बार उनकी बहनें अलग-अलग गांवों से आकर उनके साथ जुड़ती हैं।
बांसवाड़ा गांव से आईं रता बाई ने बताया कि उन्हें चलने में थोड़ी परेशानी होती है, लेकिन वे धीरे-धीरे चलते हुए पूरी यात्रा करने का प्रयास करती हैं। श्रद्धालु रास्ते में जहां रुकते हैं, वहीं अपना खाना खुद बनाते हैं। आमतौर पर दाल, रोटी और चावल जैसे साधारण भोजन ही बनाए जाते हैं। श्याम कुंवर ने बताया कि वे घर से ही पूरी तैयारी के साथ निकले हैं—आटा, दाल, घी, कपड़े और जरूरी सामान लेकर—ताकि यात्रा के दौरान किसी पर निर्भर न रहना पड़े।
कुल मिलाकर, पंचकोशी यात्रा शुरू होने से पहले ही उज्जैन में आस्था का माहौल बन चुका है। जैसे-जैसे यात्रा का दिन करीब आएगा, यह भीड़ और बढ़ने की उम्मीद है।