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CM मोहन यादव के विजन को रफ्तार: विक्रम विश्वविद्यालय ने शुरू किया अभियान, फार्मा कंपनियों को जोड़ने और स्टूडेंट्स को स्किल्ड बनाने पर फोकस
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन को ‘ग्लोबल मेडिकल हब’ के रूप में विकसित करने के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन को आगे बढ़ाने के लिए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने ठोस पहल शुरू कर दी है। इसी दिशा में विश्वविद्यालय ने फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री को जोड़ने और छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है। इस पहल के जरिए शिक्षा और उद्योग के बीच सीधा संबंध स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
फार्मा कंपनियों को आकर्षित करने के लिए शुरू हुआ अभियान
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज के मार्गदर्शन में यह अभियान फार्मेसी संस्थान के माध्यम से शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य उज्जैन को मेडिकल और फार्मा सेक्टर में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। विश्वविद्यालय इस दिशा में उद्योगोन्मुख शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है।
‘जीन से दवा तक’ विषय पर विशेषज्ञ प्रस्तुति
अभियान के पहले चरण में आयरलैंड की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में कार्यरत सेल कल्चर साइंटिस्ट डॉ. मीनल लोढ़ा ने “जीन से दवा तक” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक छोटा वैज्ञानिक विचार, रिकॉम्बिनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी, सेल कल्चर और बायोरिएक्टर जैसी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरते हुए जीवनरक्षक दवा का रूप लेता है।
दवा निर्माण की पूरी प्रक्रिया समझाई
डॉ. लोढ़ा ने विद्यार्थियों को दवा निर्माण के विभिन्न चरणों—डिस्कवरी, प्रीक्लिनिकल परीक्षण, क्लिनिकल ट्रायल, नियामक स्वीकृति और बड़े पैमाने पर उत्पादन—के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने GMP (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) और GDP (गुड डॉक्यूमेंटेशन प्रैक्टिस) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों की अहमियत पर भी प्रकाश डाला।
एक दिवसीय कार्यशाला में उद्योग से जुड़ी सीख
इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी और एमएसएमई इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर (रैम्प एवं एलयूएन की पहल) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को फार्मा इंडस्ट्री की बारीकियों से अवगत कराया गया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर अपने करियर को लेकर मार्गदर्शन भी प्राप्त किया।
AI और नई तकनीकों पर भी हुआ मंथन
कार्यशाला के दौरान भविष्य की तकनीकों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि AI किस तरह दवा खोज की प्रक्रिया को अधिक तेज और सटीक बना रहा है। इसके साथ ही लैब सुरक्षा के लिए SOP, PPE किट और कंटैमिनेशन कंट्रोल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कुलगुरु बोले—केवल किताबों तक सीमित न रहें छात्र
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है कि यहां के पूर्व छात्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन को ‘मेडिकल हब’ के रूप में विकसित करने की सौगात दी है। उन्होंने कहा कि इस विजन को जमीन पर उतारना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि उद्योग आधारित नवाचार को अपनाएं।
स्टार्टअप और प्लेसमेंट दोनों पर फोकस
विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि यहां के छात्र न केवल बड़ी कंपनियों में रोजगार प्राप्त करें, बल्कि अपने स्टार्टअप्स के जरिए भी ‘मेडिकल हब’ योजना में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यह पहल उज्जैन में फार्मा इंडस्ट्री के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों और शिक्षकों की सहभागिता
इस अवसर पर फार्मेसी संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. कमलेश दशोरा और केमिस्ट्री अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष प्रो. उमा शर्मा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने उद्योग के अनुरूप कौशल विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन तनीषा ने किया, जबकि अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. प्रवीण खिरवडकर द्वारा किया गया।