- उज्जैन के गजनीखेड़ी में प्रशासन की चौपाल: कलेक्टर-SP ने रात गांव में बिताई, मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया
- सुबह 4 बजे खुले कपाट: बाबा महाकाल का दूध-दही-घी से अभिषेक, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
- उज्जैन में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल: दूल्हे ने लौटाए 50 लाख के कैश और सोना, सिर्फ अंगूठी ली
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर खुले चांदी द्वार, बाबा का हुआ पंचामृत अभिषेक
- सिंहस्थ के लिए पुलिस को तैयार कर रहा प्रशासन: उज्जैन में पुलिस अफसरों की 21 दिन की खास ट्रेनिंग शुरू, 41 विषयों पर रहेगा फोकस; 117 अधिकारी बनेंगे “मास्टर ट्रेनर”
उज्जैन के गजनीखेड़ी में प्रशासन की चौपाल: कलेक्टर-SP ने रात गांव में बिताई, मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मध्यप्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को गांवों तक सक्रिय और जवाबदेह बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों का असर अब ज़मीनी स्तर पर दिखने लगा है। इसी क्रम में सोमवार शाम बड़नगर तहसील के ग्राम गजनीखेड़ी में जिला प्रशासन का पूरा अमला पहुंचा, जहां कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने रात्रिकालीन ग्राम चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया।
शाम करीब 7 बजे शुरू हुई इस चौपाल में लगभग दो घंटे तक गांव के अलग-अलग वर्गों—किसानों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों—ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कूमट और एसडीएम धीरेंद्र पाराशर भी उपस्थित रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने कई मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया, जबकि अन्य मामलों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए गए।
गांव पहुंचने के बाद कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने सबसे पहले गेहूं खरीद केंद्र और पॉलीहाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। चौपाल के दौरान स्वास्थ्य विभाग की एएनएम मंजुला निगम को उनके कार्यों के लिए सम्मानित भी किया गया। कलेक्टर ने बताया कि गजनीखेड़ी मंदिर से आसपास की चार से पांच पंचायतें जुड़ी हुई हैं और क्षेत्र में मौजूद जल संरचनाओं को समितियों से जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इस कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि कलेक्टर और एसपी ने गांव में ही रात्रि विश्राम किया। दोनों अधिकारियों ने रात मंदिर परिसर में बिताई, जिससे ग्रामीणों के बीच प्रशासन की मौजूदगी का अलग ही संदेश गया। अगले दिन मंगलवार सुबह वे गांव की एक टपरी पर पहुंचे, जहां चाय के दौरान उन्होंने ग्रामीणों से अनौपचारिक चर्चा कर योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लिया।
चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए। एक किसान ने गांव में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं होने की समस्या रखी, जिस पर कलेक्टर ने तुरंत निर्देश देते हुए गांव में ही आंगनबाड़ी केंद्र शुरू करने के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषण के लिए आंगनबाड़ी की व्यवस्था अनिवार्य है और इसमें किसी तरह की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
इसके अलावा सरकारी रास्ते पर अतिक्रमण की शिकायत भी सामने आई। इस पर कलेक्टर ने मौके पर मौजूद एसडीओ और पटवारी को तत्काल कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में कोई बाधा न हो।
चौपाल में पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने भी ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। खासतौर पर अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें। उन्होंने यह भी समझाया कि साइबर ठगी के मामलों से बचने के लिए किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
एसपी शर्मा ने कहा कि बच्चों की शिक्षा केवल स्कूल तक सीमित नहीं होती, परिवार भी उनकी सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान दें और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन दें।
ग्राम गजनीखेड़ी में आयोजित यह चौपाल प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम साबित हुई। रात्रि विश्राम और अगले दिन गांव में अनौपचारिक बातचीत ने यह संकेत दिया कि प्रशासन अब लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझने और समाधान देने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।