फूलों की खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी: CM ने उज्जैन में फ्लोरीकल्चर सेंटर बनाने का किया ऐलान, बोले- कम जमीन में ज्यादा आय का माध्यम बनेंगी उद्यानिकी फसलें

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:

मध्यप्रदेश में कृषि के वैकल्पिक और अधिक लाभकारी मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार अब उद्यानिकी क्षेत्र पर विशेष फोकस कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में फ्लोरीकल्चर के लिए ‘सेंटर फॉर एक्सीलेंस’ स्थापित करने की घोषणा की है। उनका मानना है कि फूलों की खेती किसानों के लिए कम जमीन में अधिक आय अर्जित करने का प्रभावी साधन बन सकती है।

मंत्रालय में आयोजित उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी और जैविक खेती की ओर भी प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खाद के उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मिट्टी की सेहत दोनों बेहतर हो सकें।

बैठक में विभागीय कार्यों की प्रगति का प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया गया कि प्रदेश की 40 शासकीय नर्सरियों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। इसके साथ ही उन जिलों में, जहां प्रेसराइज्ड इरीगेशन की सुविधा उपलब्ध है, वहां 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का विस्तार किया जा रहा है, ताकि पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

इस उच्चस्तरीय बैठक में उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा और मुख्य सचिव अनुराग जैन भी उपस्थित रहे। दोनों ने विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन और आगामी रणनीति पर चर्चा की।

उत्पादन के आंकड़ों की बात करें तो मध्यप्रदेश मसाला फसलों के उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। वहीं पुष्प और सब्जी उत्पादन के मामले में प्रदेश तीसरे स्थान पर है, जबकि फल उत्पादन में चौथे स्थान पर अपनी स्थिति बनाए हुए है। ये आंकड़े बताते हैं कि उद्यानिकी क्षेत्र में राज्य की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।

इसके अलावा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष योजना पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि ‘मखाना क्षेत्र विस्तार योजना’ के तहत प्रदेश के 14 जिलों में इस फसल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत तक अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, राज्य सरकार की यह पहल किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्प देने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें तकनीक, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन तीनों पहलुओं पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।

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