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80/84 श्री स्वप्नेश्वर महादेव
80/84 श्री स्वप्नेश्वर महादेव
काफी समय पहले कल्माषपाद नाम के एक राजा हुआ करते थे। एक बार उन्होने वन में वशिष्ट मुनि के पुत्र ओर बहू को देखा । उस समय उनका पुत्र ध्यान में बैठा हुआ था। राजा ने मुनि से कहा कि रास्ते से हट जाओं परंतु मुनि ने नहीं सुना, तो राजा ने क्रोध में आकर मुनि पर चाबुक से प्रहार करना शुरू कर दिया। यह देख वशिष्ट मुनि के दूसरे पुत्र ने राजा को श्राप दिया कि राजा तू राक्षस होगा ओर पुरषों का भक्षण करेगा। राजा ने अपनी गलती की क्षमा मंागी परंतु उसे माफी नहीं मिली। राजा ने वशिष्ट मुनि के पुत्रों ओर बाहू को खा गया। रात को राजा को कई बुरे स्वप्न आए। उसने सुबह मंत्री को बताया। मंत्री राजा को लेकर वशिष्ट मुनि के पास आया। वशिष्ट मुनि ने राजा से कहा कि राजन आप अंवतिका नगरी में महाकालेश्वर के पास स्थित शिवलिंग के दर्शन करें, इससे आप के सभी दुःस्वप्न का नाश होगा। राजा वशिष्ट मुनि के कहे अनुसार अवंतिका नगरी में आया ओर यहां शिवलिंग का दर्शन ओर पूजन किया रजा के बुरे सपनांे का नाश होने के कारण शिवलिंग स्वप्नेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुआ। मान्यता है स्वप्नेश्वर महादेव के दर्शन से बुरे सपनो का नाश होता है।