- उज्जैन में BJP का स्थापना दिवस: 560 बूथों पर कार्यक्रम, जुलूस-आतिशबाजी के साथ मनाया जश्न; नेताओं ने बताया- भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी
- अलसुबह भस्म आरती में सजे बाबा महाकाल, मंदिर में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’
- एक्ट्रेस कावेरी प्रियम ने महाकाल की भस्म आरती में की पूजा: बोलीं- यहां की ऊर्जा अद्भुत, 3 साल से आ रहीं उज्जैन!
- स्वस्ति वाचन से खुले पट; भांग-चंदन और पुष्पों से हुआ दिव्य श्रृंगार, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
- महाकाल की भस्म आरती में केंद्रीय मंत्री और क्रिकेटर पहुंचे: धर्मेंद्र प्रधान-उमेश यादव ने किया जलाभिषेक, दोनों ने लिया भगवान का आशीर्वाद
मध्यप्रदेश में ट्रांसफर पॉलिसी लागू होते ही नेताओं के दफ्तरों में लगी भीड़, उज्जैन सांसद ने लगवाया ‘नो ट्रांसफर रिक्वेस्ट’ बोर्ड!
जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में लागू की गई ट्रांसफर पॉलिसी-2025 ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी है। जैसे ही यह नीति लागू हुई, जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों पर सिफारिशें करवाने वालों की लंबी कतारें लगने लगीं। इसी कड़ी में उज्जैन-आलोट से बीजेपी सांसद अनिल फिरोजिया को भी रोजाना तबादले की अनुशंसा मांगने वालों की भीड़ का सामना करना पड़ा।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सांसद फिरोजिया को अपने सेठी नगर स्थित कार्यालय के बाहर दो स्पष्ट बोर्ड लगवाने पड़े। इन बोर्डों पर दो बेहद सख्त संदेश लिखे गए हैं –
-
“स्थानांतरण के लिए संपर्क न करें।”
-
“शस्त्र लाइसेंस के लिए संपर्क न करें।”
बता दें कि दूसरा बोर्ड पहले से ही सांसद के कार्यालय में मौजूद था, जब वे विधायक थे। लेकिन ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने के बाद उन्हें स्थानांतरण से संबंधित बोर्ड भी लगाना पड़ा। यह कदम साफ तौर पर जनता और कर्मचारियों को यह संदेश देने के लिए है कि सांसद कार्यालय सिफारिशी केंद्र नहीं है और नए नियमों के तहत ट्रांसफर सिफारिशें सांसदों या विधायकों से नहीं की जाएंगी।
दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा लागू की गई नई तबादला नीति के अनुसार सभी विभाग 30 मई 2025 तक अपने कर्मचारियों के ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके बाद सामान्य रूप से तबादले नहीं किए जाएंगे, केवल विशेष परिस्थितियों में ही इसकी अनुमति होगी।
यह घोषणा होते ही प्रदेशभर में राजनीतिक हस्तियों के दफ्तरों में लोगों का जमावड़ा लगने लगा। हर कोई चाहता है कि उसका ट्रांसफर उनकी पसंद की जगह पर हो जाए, जिसके लिए वे जनप्रतिनिधियों के पास अनुशंसा पत्र लेने जा रहे हैं। उज्जैन में यह भीड़ इतनी बढ़ गई कि सांसद अनिल फिरोजिया को खुद आगे आकर यह कदम उठाना पड़ा।