30 मार्च से 30 जून तक चलेगा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’: कलेक्टर नीरज कुमार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक संपन्न, विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारियाँ; कलेक्टर ने अभियान के लिए नियुक्त किया नोडल अधिकारी

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:

शुक्रवार को प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में कलेक्टर नीरज कुमार सिंह की अध्यक्षता में जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस अभियान का शुभारंभ आगामी 30 मार्च को वर्ष प्रतिपदा के शुभ अवसर पर क्षिप्रा नदी के तट पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम के आयोजन से किया जाएगा। इसके साथ ही, अन्य जिलों में भी नदी अथवा जल स्रोतों के समीप कार्यक्रम आयोजित कर इस अभियान की शुरुआत की जाएगी।

कलेक्टर नीरज कुमार सिंह को इस अभियान का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनकी अध्यक्षता में गठित जिला जल गंगा संवर्धन अभियान समिति अभियान की योजना, क्रियान्वयन एवं मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संभालेगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जयति सिंह एवं अन्य सहभागी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे।

अभियान के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न विभागों को अलग-अलग दायित्व सौंपे गए हैं। बैठक में कलेक्टर सिंह ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे स्वयं को सौंपे गए दायित्वों के अनुरूप कार्य योजनाएँ तैयार करें और लक्ष्यों को समय पर पूरा करें

  • शासकीय कार्यालयों में वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को अनिवार्य बनाया जाए।

  • नवनिर्माणाधीन भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली लागू करने हेतु कार्य योजना बनाई जाए।

  • नई विकसित हो रही कालोनियों में वर्षा जल संचयन प्रणाली को अनिवार्य बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए।

  • प्राकृतिक जल स्रोतों में जल प्रदूषण को कम करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं।

  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण हेतु सामूहिक श्रमदान (श्रमदान कार्यक्रम) को बढ़ावा दिया जाए।

अभियान की व्यापक योजना और क्रियान्वयन

इस अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए 30 मार्च से 30 जून 2025 तक इसकी अवधि निर्धारित की गई है। अभियान के तहत जल संरक्षण व संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक नगरीय निकाय एवं प्रत्येक ग्राम पंचायत में जन समुदाय की उपस्थिति में जल संरक्षण से जुड़े एक कार्य को प्रारंभ किया जाएगा। अभियान के दौरान निम्नलिखित प्रमुख कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी:

  1. जलाशयों की सफाई एवं संरक्षण

  2. नवीन जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण

  3. भूजल संवर्धन के उपाय

  4. छोटी नदियों, तालाबों एवं अन्य जल संरचनाओं की सफाई एवं पुनर्जीवन

  5. वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) को बढ़ावा

  6. मानसून पूर्व व्यापक पौधारोपण की तैयारी

  7. जल प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस रणनीति

  8. जल वितरण की संरचनाओं की सफाई व मरम्मत

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पिछले वर्ष जल गंगा संवर्धन अभियान का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया था। इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने इस वर्ष भी इसके योजनाबद्ध कार्यान्वयन के निर्देश दिए हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जन भागीदारी से जल संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित करना है। इसमें विभिन्न विभागों की संयुक्त पहल और समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे यह अभियान “समाज और सरकार की साझेदारी से जल संरक्षण एवं संवर्धन का एक जन आंदोलन” बन सके।

बता दें, जल गंगा संवर्धन अभियान को जन-जन तक पहुँचाने के लिए जन जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। अभियान को प्रभावी बनाने हेतु स्वयंसेवी संगठनों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, कृषि एवं अभियांत्रिकी शिक्षण और शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों, जिले के प्रतिष्ठित संतों, महात्माओं एवं समाजसेवियों को भी इस पहल में शामिल किया जाएगा।

बैठक में सीईओ जिला पंचायत जयति सिंह, डीएफओ, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे। सभी अधिकारियों को अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु उनकी भूमिका स्पष्ट करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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