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महाकालेश्वर मंदिर का नियम फिर टूटा? ‘संत’ के नाम पर गर्भगृह में कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को मिली विशेष अनुमति, वीडियो वायरल; प्रशासन बोला- संत होने के नाते दी अनुमति!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
श्रावण मास की पावनता और भक्ति के बीच उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। सावन के चौथे सोमवार, यानी 4 अगस्त को, सुबह 8:30 बजे कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर विशेष पूजन किया। यह वही गर्भगृह है जहां आम श्रद्धालुओं का प्रवेश पहले से ही प्रतिबंधित है, और जहां केवल सीमित श्रेणी के संत, पुजारी या प्रोटोकॉल के अंतर्गत आने वाले विशिष्ट जनों को ही नियमानुसार अनुमति दी जाती है।
सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। वीडियो में पुंडरीक गोस्वामी दो अन्य लोगों के साथ गर्भगृह में विधिपूर्वक पूजन करते नजर आ रहे हैं। उनके साथ कुछ महिलाएं और मंदिर के कर्मचारी भी गर्भगृह में मौजूद दिखाई दे रहे हैं। भीड़भाड़ वाले सोमवार को जब हजारों श्रद्धालु कतार में लगे रहे, तब एक कथावाचक को विशेष अनुमति के नाम पर गर्भगृह में प्रवेश देना कई सवाल खड़े करता है।
जब मंदिर प्रशासन से इस पर स्पष्टीकरण मांगा गया तो प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि पुंडरीक गोस्वामी को “संत” होने के नाते प्रवेश की अनुमति दी गई थी। लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि उनके पास कोई लिखित अनुमति थी या नहीं, और यदि नहीं थी, तो क्या यह अनुमति मौखिक थी? ऐसे मामलों में संत और कथावाचकों को किस श्रेणी में रखा जाता है – यह भी एक बड़ा प्रश्न है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब गर्भगृह के नियमों का इस प्रकार उल्लंघन हुआ हो। इससे पहले सावन के दूसरे सोमवार को विधायक गोलू शुक्ला और उनके पुत्र रुद्राक्ष का गर्भगृह में प्रवेश कर पूजन करना भी विवाद का विषय बन गया था। उस वक्त भी यही दलील दी गई थी कि व्यवस्था के तहत उन्हें प्रवेश की अनुमति दी गई थी।
दो वर्ष पूर्व उज्जैन में कथावाचक प्रदीप मिश्रा के गर्भगृह प्रवेश को लेकर भी ऐसा ही विवाद हुआ था। तब भी महाकालेश्वर प्रबंध समिति के नियमों को ताक पर रखते हुए उन्हें पूजन की अनुमति दे दी गई थी। उस समय भी मंदिर प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे और आज एक बार फिर वही स्थिति दोहराई जा रही है।