- इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बहाने उज्जैन में हनीट्रैप, युवक का अपहरण कर अश्लील वीडियो से करोड़ों जैसी वसूली की कोशिश, 10 आरोपी गिरफ्तार
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इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बहाने उज्जैन में हनीट्रैप, युवक का अपहरण कर अश्लील वीडियो से करोड़ों जैसी वसूली की कोशिश, 10 आरोपी गिरफ्तार
उज्जैन में सोशल मीडिया के माध्यम से रची गई एक सुनियोजित हनीट्रैप साजिश का खुलासा हुआ है। इंस्टाग्राम पर एक युवती से हुई दोस्ती एक 29 वर्षीय युवक के लिए बड़ी मुसीबत बन गई। पुलिस जांच में सामने आया कि युवती ने पहले युवक का विश्वास जीता और फिर नौकरी तथा काम के बहाने उसे उज्जैन बुलाया। मुलाकात के बाद आरोपियों ने पूरी योजना के तहत उसका अपहरण कर लिया और बाद में अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की। मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य की तलाश अभी जारी है।
पुलिस के अनुसार पीड़ित युवक नरवर का रहने वाला है और उसकी पहचान इंस्टाग्राम के जरिए एक युवती से हुई थी। दोनों के बीच कुछ समय तक बातचीत चलती रही, जिससे युवक को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। युवती ने उसे भरोसे में लेते हुए उज्जैन आने के लिए कहा और यह विश्वास दिलाया कि यहां नौकरी और काम से जुड़ा अच्छा अवसर मिल सकता है। युवक उसकी बातों पर भरोसा कर तय तारीख को उज्जैन पहुंच गया।
बताया गया कि युवक रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां वह युवती से मिला। इसके बाद दोनों एक होटल गए और कुछ समय वहां बिताने के बाद बाहर निकले। जैसे ही वे तपोभूमि क्षेत्र की ओर पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठे बदमाश दो कारों में वहां पहुंचे और युवक की गाड़ी को रोक लिया। आरोपियों ने बिना कोई मौका दिए युवक को अपने कब्जे में ले लिया और जबरन वहां से ले गए।
पीड़ित के बयान के अनुसार आरोपियों ने उसे रास्ते भर डराया-धमकाया और उसके साथ मारपीट भी की। उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई ताकि वह उस स्थान की पहचान न कर सके जहां उसे ले जाया जा रहा था। सुनसान इलाके में पहुंचने के बाद बदमाशों ने युवक को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। इसी दौरान उसका अश्लील वीडियो बनाया गया और उसे वायरल करने की धमकी देकर भारी रकम की मांग शुरू कर दी गई।
आरोपियों ने शुरुआत में युवक और उसके परिवार से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी। लगातार धमकियों और दबाव के बीच बाद में यह रकम घटाकर 26 लाख रुपये कर दी गई। बदमाशों ने साफ कह दिया कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा, जिससे उसकी और उसके परिवार की बदनामी होगी। इसी डर का फायदा उठाकर आरोपियों ने पैसे वसूलने की कोशिश की।
परिजनों ने युवक की सुरक्षित रिहाई के लिए हरसंभव प्रयास किए। आरोपियों की लगातार धमकियों के कारण परिवार ने एक प्लॉट बेचकर 10 लाख रुपये का इंतजाम किया और यह रकम उन्हें सौंप दी। इसके बावजूद बदमाश बाकी राशि की मांग करते रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने युवक की कार, सोने की चेन और घड़ी भी अपने पास रख ली। करीब एक दिन तक युवक को अपने कब्जे में रखने के बाद आरोपी उसे इंदौर रोड क्षेत्र में छोड़कर फरार हो गए।
रिहा होने के बाद युवक ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने परिवार को दी। इसके बाद 20 जुलाई को नानाखेड़ा थाने पहुंचकर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने घटनास्थल, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की दिशा में तेजी से काम किया।
जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी माध्यमों का सहारा लिया। इसी आधार पर मुख्य आरोपी लोकेश शर्मा सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में पुलिस को गिरोह की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिलीं। हालांकि मामले में शामिल दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह पहले ऐसे लोगों की पहचान करता था जिनके पास अच्छी आर्थिक स्थिति या संपत्ति होने की संभावना होती थी। इसके बाद एक युवती के माध्यम से सोशल मीडिया पर उनसे संपर्क स्थापित किया जाता था। विश्वास कायम होने के बाद उन्हें किसी बहाने से बुलाकर सुनियोजित तरीके से फंसाया जाता था। इसके बाद अपहरण, मारपीट और अश्लील वीडियो बनाकर बदनामी का डर दिखाया जाता था, ताकि उनसे बड़ी रकम वसूली जा सके।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस गिरोह ने इसी तरह की वारदातें पहले भी की हैं या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। साथ ही जब्त किए गए सामान, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों की जांच के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।