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इस बार गुरु अस्त होने से शादियां 22 दिन बाद
उज्जैन | मंगलवार को छोटी दिवाली यानी देवउठनी एकादशी धूमधाम के साथ मनाई गई। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी शेषशय्या पर योगनिद्रा से जाग जाते हैं और चार महीने बाद पाताल लोक से क्षीरसागर में लौटे। इसके साथ ही शादी-ब्याह, गृह प्रवेश, गृह निर्माण आदि मांगलिक शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। हालांकि इस बार गुरु का तारा अस्त होने से देवउठनी एकादशी पर विवाह का मुहूर्त नहीं है। विवाह 23 नवंबर से शुरू होंगे।
नया व्यवसाय
देवशयन के कारण चार महीने तक नए व्यापार-व्यवसाय की भी शुरुआत नहीं होती है। देवउठनी ग्यारस के बाद अब लोग नया व्यापार शुरू कर सकेंगे। इसके अलावा अन्य किसी भी तरह का नया कार्य भी शुरू करना फलदायक रहेगा।
देव-प्रतिष्ठा
मंदिरों में देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठा अब शुरू हो सकेगी। साथ ही नए मंदिर का भूमि पूजन कार्य भी शुरू होगा। इसके अलावा बटुकों का उपनयन संस्कार सहित सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो सकेगी।
गृह प्रवेश, भूमिपूजन
नए घर के लिए भूमिपूजन, गृह प्रवेश आदि भी अब शुरू हो जाएंगे। हालांकि गुरु का तारा अस्त है। इसलिए 6 नवंबर से तारा उदय होने के बाद इनकी शुरुआत भी हो जाएगी। जुलाई से यह सभी कार्य बंद थे। अब इसके मुहूर्त पंचांगों ने नवंबर से दिए हुए हैं।
विवाह 23 से
चार महीने से थमे विवाह आदि मांगलिक कार्यों की शुरुआत देवउठनी एकादशी के साथ हो जाती है। हालांकि इस बार गुरु का तारा अस्त होने से विवाह के मुहूर्त पंचांगों ने नहीं दिए हैं। पं. श्यामनारायण व्यास के अनुसार शादी का पहला मुहूर्त 23 नवंबर से है।