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उज्जैन:कांग्रेस की खेमेबाजी पर खुलकर बोले राजेंद्र भारती
केवल समर्थक हूं…
उज्जैन(राजेश रावत):कांग्रेस नेता और सिंधिया परिवार से जुड़े महंत राजेंद्र भारती पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा से सांसद भी बन गए हैं। अभी तक उज्जैन में सिंधिया से जुड़े नेताओं का अगला कदम क्या होगा, यह साफ नहीं हो पाया है। इस मुद्दे पर राजेंद्र भारती न सिर्फ खुलकर बोले, बल्कि कांग्रेस की खेमेबाजी को संगठन के लिए नुकसानदायक भी बताया।
लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद विचारधारा का परिवर्तन का फैसला ?
सिंधिया जी ने भाजपा जब ज्वाइन की थी, तभी उन्होंने अपना स्पष्ट चिंतन बता दिया था। कांग्रेस धरातल पर पहुंच नहीं पा रही है। अपने उद्ेश्य से भटक रही है। यानी जनता की समस्याओं को सही तरीके से नहीं उठा पा रही है। इसका उदाहरण कश्मीर का मुद्दा है। सिंधिया जी का कहना था कि जनमत क्या कह रहा है यह कांग्रेस और उसके नेता समझ नहीं पा रहे हैं। वास्तविकता से दूर जा रही है पार्टी। इसका साफ संदेश था कि वे जन आकांक्षा की पूर्ति के लिए बेझिझक और दृढ़ता से अपनी बात कर रहे। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सिंधिया जी के साथ एक कार्यकर्ता के रूप में खड़ा हो गया। नई शुरुआत हुई है, अब किंतु परंतु नहीं रहेगा।
आप भी तो एक समय खेमेबाजी में रहे हैं
तब खेमेबाजी का फायदा कांग्रेस को मिलता था। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि कांग्रेस को गुटबाजी, खेमेबाजी का फायदा उस समय मिलता था, तब विपक्ष कमजोर था। अब हालात बदल गए हैं। चुनाव के समय टुकड़ों में कार्यकर्ताओं के बटने से पार्टी को नुकसान होता है।
आप भाजपा से किस तरह से जुड़े हैं और खुद को कहां पाते हैं?
मैं अभी भाजपा का सदस्य नहीं बना हूं। विधिवत रूप से सदस्य बनने के बाद भाजपा का हिस्सा बनूंगा। अभी सिंधिया जी का कार्यकर्ता होने के नाते अन्य लोगों की तरह भाजपा से समर्थक के रूप में जुड़ा हूं। सदस्यता के विषय में भाजपा और सिंधिया जी फैसला लेंगे। जैसा निर्देश मिलता तब निर्णय लिया जाएगा।
आपके समर्थक भाजपा से जुड़ेंगे, उनका असमंजस कैसे दूर होगा
हम सब सिंधिया जी की स्पष्ट विचारधारा से जुड़े हुए हैं। इसमें किंतु परंतु की गुंजाइश नहीं। सक्षम और कुशल व्यक्ति के साथ राजनीति करते समय लाभ हानि नहीं देखी जाती है। कुछ कार्यकर्ता मेरे साथ भाजपा में जाएंगे, तो कुछ कार्यकर्ता जो मुझे तो पसंद करते हैं परन्तु फिर भी कांग्रेस में बने रह सकते हैं। कांग्रेस में निष्ठावन कार्यकर्ताओं का सम्मान करने वालों का प्रतिशत बहुत कम है। क्योंकि पार्टी खेमेबाजी में चल रही है।
22 विधायक और सिंधिया किस तरह से दल बदलकर जनता के सामने जाएंगे
सिंधिया परिवार का चुनौती को स्वीकर करने का इतिहास रहा है। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने जनता की समस्याओं को हल करने के लिए आवाज उठाई थी। जनता के लिए संघर्ष करते हुए अपने दल को छोडऩे का फैसला साहसिक नेतृत्व देने वाला ही ले सकता है। 22 विधायक जो जनता के कष्ट को दूर करने के लिए कांग्रेस को अलविदा कह दिया। जनहित के मुद्दों पर भाजपा का दामन थामा है। इसलिए जनता का साथ सभी को मिलेगा।