उज्जैन की हेमलता को राष्ट्रपति भवन से मिला निमंत्रण, 15 अगस्त के ‘एट होम’ समारोह में होंगी शामिल

उज्जैन की हेमलता सूर्यवंशी को उनकी बहादुरी और सूझबूझ के लिए राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले 15 अगस्त के ‘एट होम’ समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। हेमलता ने अपनी जान की परवाह किए बिना शिप्रा नदी में डूब रही 14 साल की बच्ची की जान बचाई थी।

यह घटना मई 2026 में पंचकोशी यात्रा के दौरान उज्जैन के रामघाट पर हुई थी। स्नान के दौरान 14 साल की बच्ची का अचानक पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई। बच्ची को डूबता देखकर हेमलता ने बिना देर किए उसे बचाने के लिए कदम उठाया।

खास बात यह है कि हेमलता को खुद तैरना नहीं आता था। इसके बावजूद उन्होंने घबराने के बजाय मौके पर सूझबूझ दिखाई और बच्ची तक पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। उनके इस साहसिक कदम से बच्ची की जान बच गई।

हेमलता के इस साहस में उन्हें मिली आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग भी काफी काम आई। उन्होंने बताया कि इसी साल 10 से 17 मार्च तक होमगार्ड स्टाफ के माध्यम से ‘युवा आपदा मित्र’ की सात दिवसीय ट्रेनिंग ली थी।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उनकी ड्यूटी रामघाट पर लगाई गई थी। आपदा की स्थिति में किस तरह तुरंत निर्णय लेना है और बचाव के दौरान किन बातों का ध्यान रखना है, इसकी जानकारी उन्हें प्रशिक्षण के दौरान मिली थी।

रामघाट पर बच्ची के डूबने की घटना के समय हेमलता ने इसी प्रशिक्षण से मिली जानकारी और अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल किया। तैरना नहीं आने के बावजूद उन्होंने जोखिम उठाकर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हेमलता को अब 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में होने वाले ‘एट होम’ समारोह में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इस निमंत्रण के बाद उनके परिवार और परिचितों में खुशी का माहौल है। यह उनके साहस और मानवता के प्रति किए गए प्रयास का सम्मान माना जा रहा है।

राष्ट्रपति भवन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हेमलता 12 अगस्त को उज्जैन से दिल्ली रवाना होंगी। इस विशेष अवसर को लेकर उनके परिवार में उत्साह है और उनके साहस की चर्चा भी हो रही है।

फिलहाल हेमलता प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। उनका लक्ष्य सब-इंस्पेक्टर बनकर देश की सेवा करना है। इसके साथ ही उन्होंने आगामी सिंहस्थ मेले में भी आपदा मित्र के रूप में अपनी सेवाएं देने का संकल्प लिया है।

हेमलता की कहानी यह दिखाती है कि मुश्किल परिस्थिति में सही समय पर लिया गया फैसला किसी की जिंदगी बचा सकता है। तैरना नहीं आने के बावजूद उन्होंने जिस साहस और समझदारी का परिचय दिया, उसी के चलते उन्हें राष्ट्रपति भवन के इस विशेष कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है।

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