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उज्जैन में पनीर सप्लाई में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: दूसरी डेयरी के नाम पर होटलों को दिए जा रहे थे बिल, खाद्य विभाग ने जब्त किए नमूने
उज्जैन में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पनीर की सप्लाई से जुड़े एक कथित फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की जांच के दौरान सामने आया कि होटलों में सप्लाई किए जा रहे पनीर के साथ दूसरी डेयरी के नाम से बिल दिए जा रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने मौके से पनीर जब्त कर उसके नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। साथ ही पूरे प्रकरण की जानकारी पुलिस को भी उपलब्ध कराई जा रही है।
खाद्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के कुछ होटल और भोजनालयों में सप्लाई किए जा रहे डेयरी उत्पादों के बिल और वास्तविक स्रोत में अंतर है। शिकायत के आधार पर अधिकारियों ने निगरानी शुरू की और महाकाल मंदिर क्षेत्र स्थित चौबीस खंभा माता मंदिर के पीछे संचालित एक होटल पर कार्रवाई की योजना बनाई।

जांच के दौरान अतुल बढ़वार नाम का युवक होटल में पनीर की डिलीवरी करने पहुंचा। पहले से मौजूद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने उसे रोककर पनीर की खरीद, परिवहन और बिलों से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई।
प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को पता चला कि युवक नागझिरी स्थित यशोदा डेयरी से पनीर खरीदकर लाता था, लेकिन होटल संचालकों को फ्रीगंज स्थित मधुर डेयरी के नाम से जारी बिल उपलब्ध कराता था। बिल और वास्तविक खरीद के बीच इस अंतर ने विभाग को फर्जी बिलिंग की आशंका को लेकर सतर्क कर दिया।
अधिकारियों ने मौके पर मौजूद पनीर को जब्त करते हुए उसके नमूने विधिवत सील किए और गुणवत्ता परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेज दिए। इसके अलावा सप्लाई से जुड़े पुराने बिल, खरीद से संबंधित रिकॉर्ड तथा आवश्यक लाइसेंस भी जांच के लिए मांगे गए हैं, ताकि पूरे नेटवर्क की सत्यता की पुष्टि की जा सके।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी बसंत शर्मा और बीएस देवलिया ने मौके पर दस्तावेजों का परीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में बिलों के उपयोग को लेकर कई विसंगतियां सामने आई हैं। अब उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि सप्लाई प्रक्रिया में किसी प्रकार का नियम उल्लंघन हुआ है या नहीं।
विभाग का कहना है कि यदि दस्तावेजों की जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट में किसी प्रकार की अनियमितता या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अन्य संबंधित एजेंसियों की भी मदद ली जाएगी।
मामले की सूचना महाकाल थाना पुलिस को भी दी जा रही है, ताकि फर्जी बिलों के उपयोग और दस्तावेजों से जुड़े पहलुओं की अलग से जांच की जा सके। यदि जांच में किसी प्रकार की धोखाधड़ी या कूटरचना के प्रमाण मिलते हैं तो कानूनी कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
फिलहाल खाद्य विभाग प्रयोगशाला से आने वाली रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जब्त किया गया पनीर निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। साथ ही बिलिंग में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर संबंधित पक्षों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से शहर में डेयरी उत्पादों सहित अन्य खाद्य पदार्थों की जांच और निरीक्षण अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।