- 40° के पार तापमान, फिर भी नहीं थमी आस्था: महाकाल में रोज 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु; पहली बार महाकाल लोक में शुरू हुआ फोगिंग सिस्टम
- उज्जैन की 5 माह की बच्ची SMA-1 से जूझ रही: 15 करोड़ के इंजेक्शन के लिए जंग, सोनू सूद ने बढ़ाया हाथ; भोपाल एम्स में चल रहा इलाज
- 15 साल पहले खत्म हो चुकी थी लीज; हाईकोर्ट से स्टे हटते ही UDA का एक्शन, बेगमबाग में 5 मकान तोड़े; अब तक 30 से ज्यादा निर्माण हटाए जा चुके
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: स्वस्ति वाचन के बाद खुले पट, पंचामृत अभिषेक के बाद पुष्पों से दिव्य श्रृंगार
- सप्तसागर विकास को गति देने के निर्देश: निगम आयुक्त ने चार प्रमुख जलाशयों का किया निरीक्षण, गहरीकरण-सौंदर्यीकरण पर जोर
उज्जैन में महाकाल मंदिर से शुरू हुई होली:महाकाल की भस्म आरती में जमकर उड़ा रंग-गुलाल
कोरोना संक्रमण के बाद सोमवार को देशभर में धूमधाम से होली का पर्व मनाया जा रहा है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी होली की धूम है। परंपरा अनुसार होली के त्योहार की शुरुआत शहर में सबसे पहले बाबा महाकाल मंदिर प्रांगण से हुई। बाबा महाकाल के दर पर धूमधाम से होली का उत्सव मनाया गया। सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आती में इस बार भक्त तो शामिल नहीं हो पाए, लेकिन पंडे-पुजारियों ने महाकाल के साथ होली खेली। यहां सभी ने बाबा की भक्ति में लीन होकर अबीर गुलाल और फूलों के साथ होली मनाई। रंग-गुलाल ऐसा उड़ा कि बाबा का दरबार रंगों से सराबोर हो गया।
उज्जैन में सभी त्योहारों की शुरुआत बाबा महाकाल के आंगन से होती है। परंपरा अनुसार होली का पर्व भी बाबा के साथ होली खेलकर शुरू किया गया। परंपरा अनुसार भस्म आरती में बाबा महाकाल को रंग-गुलाल लगाया गया। पंडे- पुजारियों ने आरती के दौरान बाबा की भक्ति में लीन होकर अबीर गुलाल और फूलों के साथ होली खेली। बता दें कि बाबा महाकाल के दर पर खेली जाने वाली होली में हजारों की संख्या में भक्त शामिल हुआ करते थे, लेकिन इस बार कोरोना के कारण ऐसा नहीं हो सका। भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने के कारण बिना भक्तों के बिना ही मंदिर में होली मनाई गई।
सुबह 4 बजे होती है भस्मआरती
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में ही भस्म आरती की परंपरा है। रोजाना सुबह 4 बजे बाबा महाकाल को भस्म चढ़ाई जाती है। परंपरा अनुसार दिवाली हो, होली हो, गुड़ी पड़वा हो या फिर नया साल हर त्योहार बाबा की भस्माआरती से ही शुरू होता है। इसी कड़ी में सुबह अभिषेक कर बाबा को भस्म चढ़ाई गई। इसके बाद गुलाल लगाकर होली के पर्व की शुरुआत की गई।