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उज्जैन में यह कैसा टोटल लॉकडाउन…? नगर सीमा पर न कोई जांच, न पूछताछ…
यह टेक्सी भी अन्य वाहनों की तरह बगैर किसी पूछताछ के, पर्ची दिखाकर उज्जैन में प्रवेश कर गई। ऐसा आज सुबह होता रहा। हमने जब एक टोल कर्मचारी से चर्चा की तो उसने कहा भैया,ये हमारी ड्यूटी थोड़े ही है और हम क्यों पूछे नानाखेड़ा थाने से कि आपके यहां से किसी की आज ड्यूटी क्यों नहीं लगाई? लॉकडाउन है तो उसका पालन पुलिस-प्रशासन करवाए। हम तो ये देखते हैं कि अगला बगैर टोल दिए तो नहीं आ जा रहा।
इंदौर एयरपोर्ट पर उज्जैन वालों की नहीं हुई कोई जांच
आज सुबह मुंबई से इंदौर की फ्लाइट आई। इस फ्लाइट से इंदौर-उज्जैन सहित अन्य शहरों में जाने वाले यात्री आए। फ्लाइट अपने समय से करीब आधा घण्टा पहले ही आ गई । उतरने वाले लोगों से पूछा गया की कहां के लिए आए हैं? इंदौर के लिए आने वालों को अलग कतार में खड़ा किया गया। उज्जैन अथवा अन्य शहर के लोगों को अलग कतार में खड़ा किया गया।
इंदौर जाने वालों को वहां के जिला प्रशासन के निर्देश पर थर्मल स्केनर सहित जांचों से गुजरना पड़ा और निर्देश दिए गए कि वे इतने दिनों तक होम क्वारेंटाईन हो जाएं। इन लोगों को सार्थक एप डाउन लोड करवाया गया। मोबाइल नम्बर लिखा गया। दूसरी कतार में उज्जैन और अन्य शहरों के लोग खड़े थे, इन्हें कुछ नहीं कहा गया,जाने दिया गया। यह सोचकर कि जब ये इनके जिले में प्रवेश करेंगे तो वहां का प्रशासन इनकी जांच करेगा और होम क्वारेंटाईन करेगा ही, लेकिन उज्जैन टोल नाके पर कोई था ही नहीं तो न ऐसे लोगों की जांच हुई न इन्हे कोई निर्देश दिए गए।
कांवड़ यात्री भी आ रहे… जबकि प्रवेश है प्रतिबंधित
जब हमने यह पूछा कि इंदौर से उज्जैन के बीच करीब 100 कांवड़ यात्री आ रहे हैं और उनके साथ इंदौर पासिंग लोडिंग वाहन भी हैं, तो क्या उन्हें उज्जैन जाने दोगे? फिर वही जवाब आया भिया, ये काम पुलिसवालों का है। हम कौन होते हैं रोकने वाले?