- महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
- बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर समेत खिलाड़ियों ने भस्म आरती में लिया आशीर्वाद
उपशास्त्रीय एवं भक्ति संगीत में गायकी से किया मंत्रमुग्ध
स्वर-संवाद सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था उज्जैन द्वारा संगीत रसिक श्रोताओं के लिये 24 अक्टूबर को पद्मश्री स्व. डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की स्मृति में दिवाळी पहाट का उपशास्त्रीय एवं भक्ति संगीत का आयोजन अभिरंग नाट्यगृह, कालिदास अकादमी में हुआ। अतुल मुजुमदार ने बताया कि प्रात: 8 बजे शुरू हो कर लगभग दो घंटे चले इस कार्यक्रम में पुणे से आए किराना घराने के प्रसिद्ध कलाकार पं. संजय गरुड़ ने अपनी गायकी से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। पं. संजय ने राग मियां की तोड़ी में विलंबित एक ताल बड़ा खय़ाल गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की,
फिर छोटा खय़ाल एवं उसके बाद पं. भीम सेन जोशी द्वारा गाये भजन बाजे रे मुरलिया बाजे, तीर्थ विठ्ठल-क्षेत्र विठ्ठल एवं पं. जितेंद्र अभिषेकी द्वारा गाया गीत हे सुरांनो चंद्र व्हा प्रस्तुत किये। अंत में जो भजे हरी को सदा भजन गाकर पं. संजय गरुड अपने गायन को विराम दिया। संवादिनी में डॉ. विवेक बंसोड़, तबले के साथ हितेंद्र दीक्षित, झांझ के साथ विश्वास चंदोलीकर, और हार्मोनियम के साथ अनुश्री बंसोड एवं कल्याणी सुगंधी ने संगत दी। संचालन सौ. दाक्षायणी पळशीकर ने किया।