- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: स्वस्ति वाचन के बाद खुले पट, पंचामृत अभिषेक के बाद पुष्पों से दिव्य श्रृंगार
- सप्तसागर विकास को गति देने के निर्देश: निगम आयुक्त ने चार प्रमुख जलाशयों का किया निरीक्षण, गहरीकरण-सौंदर्यीकरण पर जोर
- महाकाल मंदिर परिसर के पास खुदाई में मिला शिवलिंग: निर्माण कार्य रोका गया, दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
- भोर में खुले महाकाल के पट: जल और पंचामृत से अभिषेक, रजत आभूषणों में सजे बाबा
- 8 साल बाद जेष्ठ में अधिकमास का दुर्लभ संयोग: 17 मई से 15 जून तक रहेंगे मांगलिक कार्य बंद, धार्मिक साधना, दान-पुण्य और तीर्थ के लिए श्रेष्ठ समय
औंधे मुंह गिरा आलू, भेड़ों को खिला रहे गडरिए
उज्जैन: आलू के दाम अर्श से फर्श पर क्या आए यह भेड़ों का भोजन बन गए। घास की कमी और सस्ते होने के कारण गडरिए बड़ी मात्रा में आलू खरीदकर इन्हें भेड़ों को खिला रहे हैं। इससे उन्हें घास के लिए भटकना नहीं पड़ रहा और घास से कम कीमत खर्च करना पड़ रही है। २० से ३० रुपए कट्टी में उन्हें आलू मिल रहा है।
राजस्थान से बड़ी संख्या में गडरिए भेड़-बकरियों को लेकर प्रतिवर्ष मालवा क्षेत्र में आते हैं। इस बार भी गड़रिए देवास रोड पर खुले आसमान के नीचे ठहरे हुए हैं। राजस्थान में पानी और घास की कमी के चलते ये ऊंट और भेड़-बकरियां को लेकर आए हैं। घास की कमी यहां भी बनी है, ऐसे में इन्होंने नया रास्ता खोज निकाला है। आलू की कीमत ५० पैसे किलो होने से गडरियों ने मंडी से २००० कट्टी (प्रति कट्टी में ५० किलो) आलू खरीद लिया है और इन्हें ही भेड़ों को खिला रहे हैं। पाली (राजस्थान) के रहने वाले गडरिए नारायण देवासी, मांगू देवासी एवं छोगालाल देवासी ने बताया हर साल दो महीने के लिए यहां आते हैं। इस मौसम में राजस्थान में घास नहीं मिलती। मालवा में आसानी से पानी व घास मिल जाती है लेकिन इस बार यहां भी घास की कमी है। आलू काफी सस्ता है और भेड़ें भी काफी चाव से खाती हैं इसलिए २००० कट्टी आलू खरीदा है। यह आलू १० से १५ दिन तक चलेगा। एक भेड़ को तीन आलू से ज्यादा नहीं खिलाते वरना उनकी जान भी जा सकती है।