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घर को ही बनाया बीमार व असहाय पशुओं का अस्पताल
कैसे कुत्ते, बिल्ली और यहां तक कि गायों के बछड़े घायल छोड़ दिए जाते हैं। सड़क पर इन्हें जख्मी देख मेरा मन पसीज जाता है। यह कहना है महाश्वेतानगर में रहने वाली साधना जेजुरीकर का। वे आठ साल से बीमार और असहाय पशुओं की देखरेख में जुटी हैं। उनका कहना है कि इस अवधि के दौरान 40 मादा कुत्तों की नसबंदी करवा चुकी हैं। यह काम आसान नहीं था। इसके लिए कई लोगों से चर्चा की लेकिन बात नहीं बनी तो खुद ने अपने घर के एक कोने को केयर सेंटर में बदला। वहां ऐसे पशुओं को रखा जो किसी को सड़क पर घायल अवस्था में मिले थे। उनका पशु चिकित्सक से उपचार करवाया। हालत में सुधार होने के बाद उनकी देखरेख भी की। जेजुरीकर ने एक वेबसाइट भी बनाई है। इसके जरिए वे लोगों को जागरूक करने में जुटी हैं। उनका कहना है कि पालतु पशुओं के साथ ऐसे पशुओं का भी हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। यह हमारे लिए किसी सुरक्षा घेरे की तरह हैं।