- गंगा दशहरा पर महाकाल मंदिर में शुरू हुई 16 घंटे की अखंड नृत्य आराधना, शयन आरती तक कलाकार देंगे नृत्यांजलि
- महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
ज्योतिषियों में पर्व को लेकर मतभेद, दो दिन मनेगा धनतेरस का पर्व
दीपावली के पर्वों में धनतेरस को लेकर ज्योतिष विद्वान एकमत नहीं है। पंचांग भेद से धनतेरस 12 व 13 नवंबर दोनों दिन मानी जा रही है। प्राचीन कालगणना के मानने वाले ज्योतिषविद् 12 को धनतेरस बता रहे हैं। उनके पंचांगों में भी 12 को धनतेरस बताई गई है।
पंचांगकर्ता पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार गणना की प्राचीन विधि से पंचांग बनाने वाले सभी विद्वान 12 को धनतेरस मान रहे हैं। सभी प्राचीन गणना वाले पंचांगों में धनतेरस इसी दिन बताई है। क्योंकि धनतेरस का पर्व प्रदोष में तिथि होने पर मनाया जाता है।
इसलिए 12 को धनतेरस मनाना श्रेष्ठ है। पंचांगकर्ता पं. श्यामनारायण व्यास के अनुसार धनतेरस 13 नवंबर को रहेगी। प्रदोषकाल में भी तेरस 13 को ही है। इसलिए 13 को पर्व मनाया जाना चाहिए। ज्योतिषविद् पं. मनीष शर्मा के अनुसार पंचांग भेद के कारण इस बार दीपावली की सभी तिथियों को लेकर इसी तरह के मतभेद हैं।
क्योंकि तिथियों का परिवर्तन ऐसे समय हो रहा है जिससे दो दिन तिथि मानी जा रही है। हालांकि अधिकांश पंचांगों में धनतेरस 12 नवंबर को बताई गई है। ज्योतिषविद् अर्चना सरमंडल के अनुसार पंचांगों में 12 व 13 दोनों दिन धनतेरस मानी गई है। लोकाचार के अनुसार धनतेरस की खरीदी 13 नवंबर को की जाना श्रेष्ठ है।