- महाशिवरात्रि पर उज्जैन उमड़ा आस्था का सैलाब: अब तक 2.20 लाख श्रद्धालु पहुंचे, आज 10 लाख का अनुमान
- महाशिवरात्रि से पहले महाकाल दरबार में अंतरराष्ट्रीय पुष्प सज्जा की शुरुआत: 40 से अधिक विदेशी फूलों से सजेगा परिसर; बेंगलुरु से आए 200+ कलाकार तैयारियों में जुटे
- उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के विशेष पूजा-विधि: स्वस्ति वाचन के साथ खुले पट, राजा स्वरूप में सजा दरबार
- महाशिवरात्रि से पहले उज्जैन में हाई अलर्ट: देवास गेट से रेलवे स्टेशन तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन, 100 पुलिसकर्मी पांच टीमों में तैनात
- महाशिवरात्रि पर महाकाल दर्शन के लिए डिजिटल कंट्रोल रूम, गूगल मैप से तय होगा आपका रास्ता: जाम लगते ही मैप से गायब होगा रूट, खाली पार्किंग की ओर मोड़ दिया जाएगा ट्रैफिक
नगर सरकार बता रही “खान” को “शिप्रा” का पानी, विपक्ष बोला- सूख गई शिप्रा तो पानी कहां से आया ?
उज्जैन । शहरवासी जलसंकट की मार झेल रहे हैं। वजह शहर के एकमात्र जलप्रदाय के स्रोत गंभीर का सूख जाना। शिप्रा में भी पानी खत्म हो चुका है लिहाजा अब शहर में इंदौर की प्रदूषित कान्ह (खान) नदी का मटमैला पानी सप्लाय किया जा रहा। इस पानी को पीना तो दूर नहाया भी नहीं जा सकता। इस परिस्थिति में लोगों ने आरओ वाटर की कैन लेना शुरू कर दिया है। इसी पानी को पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह शहर के हालात हैं लेकिन नगर सरकार हालात से वाकिफ होते हुए भी इसे नहीं मान रही है।
नगर सरकार और उनके नुमाइंदों का कहना है कि शिप्रा और गंभीर से पानी को मिक्स कर शहर में जलप्रदाय किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में कान्ह के गंदे पानी से लबालब होने के बाद वहीं पानी लोगों को पिलाया जा रहा है। इसके लिए गऊघाट पर फ्लोटिंग पंपिंग स्टेशन बनाकर पानी लिया जा रहा है। शहर में सप्लाय गंदे पानी से खुजली और एलर्जी जैसे समस्याएं लोगों को हो रही हैं।
कांग्रेस पार्षद कहते हैं :-
शहर में तो गंदा पानी सप्लाय हो ही रहा है लेकिन यदि मैं अपने क्षेत्र की बात करूं तो पूरे क्षेत्र में गंदा पानी आ रहा है। नर्मदा लाने के नाम पर करोड़ा रुपए खर्च व्यर्थ कर दिए गए। अभी तक पानी नहीं आया। महानंदानगर, बसंत विहार, महाशक्तिनगर टंकियों से गंदा पानी सप्लाय किया जा है। प्रशासन जवाब दे कि शिप्रा जब सूख चुकी है तो यह पानी कहां से आ रहा है।
-शैलेंद्र (बीनू) कुशवाह, पार्षद वार्ड ५१
शहर में जो पानी सप्लाय हो रहा है वह खान का है। क्या यह सरकार इतनी कंगाल हो गई है कि पंप नहीं चला सकी। सरकार जनता से खिलवाड़ शुरू कर दिया है। सरकार जनता के हित के लिए होती है और यदि वह जनता का हित नहीं देख रही तो इसका दंड आने वाले समय में मिलेगा। शहर में खान नाली का पानी दिया जा रहा है। पार्टी शुरू से ही इसका विरोध कर रही है।
-रवि राय, पूर्व पार्षद
जलकार्य समिति प्रभारी का तर्क
गंभीर डेम में अभी १०० एमसीएफटी पानी है। इसमें से ४ एमसीएफटी पानी लिया जा रहा है। इसे शिप्रा के पानी के साथ मिक्स कर दिया जा रहा है। सप्लाय किए जाने वाले पानी की पहले टेस्टिंग की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी जांच करवाई गई है, जिसमें पानी की ओके रिपोर्ट आई है। मैं लगातार गंभीर डेम और गऊघाट पंपिंग स्टेशन का दौरा कर रही हूं। गऊघाट पर शिप्रा नदी में बहता पानी है। यह वो पानी है जो रोहिणी में बारिश होने के चलते इंदौर से आया था। शहर की जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। बूंद-बूंद पानी को जनता तक पहुंचाया जाएगा।