- गंगा दशहरा पर महाकाल मंदिर में शुरू हुई 16 घंटे की अखंड नृत्य आराधना, शयन आरती तक कलाकार देंगे नृत्यांजलि
- महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
नौतपा की गर्मी भी नहीं रोक पाई प्रहलाद की दंडवत यात्रा, डेढ़ वर्ष में 665 किमी तय कर पहुंचे महाकाल लोक
सार
विस्तार
क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसी भीषण गर्मी में बिना चप्पल कोई व्यक्ति अपनी मन्नत पूरी करने के लिए एक दो नहीं बल्कि पूरे 665 किलोमीटर का सफर तय कर करेगा। वो भी दंडवत प्रणाम करते हुए, ये सुनकर शायद आपका जवाब होगा, नहीं, लेकिन ऐसा हुआ है। नौतपा की तपन में सूरज के तेवर ऐसे हैं कि बहुत जरूरी होने पर ही लोग घर से निकल रहे हैं। ऐसी भीषण गर्मी में एक बुजुर्ग 665 किमी दंडवत प्रणाम करते हुए राजस्थान के राजसमद नाथद्वारा से उज्जैन पहुंच गया। उनकी आस्था देख हर कोई अचंभित रह गया।
जानकारी के अनुसार राजस्थान के राजसमंद में रहने वाले 55 वर्षीय प्रहलाद उर्फ शंभू बुनकर पत्नी पूजा के साथ करीब डेढ़ वर्ष पहले अपने घर से इस यात्रा पर निकले थे। राजस्थान से अपनी यात्रा शुरू कर सबसे पहले प्रहलाद ने रामदेवरा के दर्शन किए। उसके बाद अजमेर पुष्कर जी के दर्शन करते हुए वे उज्जैन महाकाल मंदिर पहुंच गए। अब अंत में वे ओंकारेश्वर और अयोध्या तक इसी तरह दंडवत यात्रा करेंगे।
बताया जाता है कि प्रहलाद रोजाना भीषण गर्मी में पैदल बिना चप्पल से करीब डेढ़ किमी की दंडवत यात्रा कर रहे हैं। वे अपने हाथ में नारियल लेकर दंडवत प्रणाम करते हुए आगे चलते हैं। उनका साथ देने के लिए पत्नी भी कपड़े का झोला लेकर पीछे-पीछे चल रही हैं। इन बुजुर्ग पति-पत्नी की हर व्यक्ति अपने हिसाब से मदद कर रहा है।
भूख प्यास की हमे कोई चिंता नहीं
इस यात्रा को सतत करने वाले प्रहलाद का कहना है कि ईश्वर की कृपा ऐसी है कि जब भूख लगती है, उससे पहले ही भोजन मिल जाता है और प्यास लगने से पहले पानी देने वाला हमारे सामने होता है। रोजाना ही खाने पीने का इंतजाम हो जाता है। कभी श्रद्धालु लोग खाना खिला देते हैं तो कभी हम होटल में खा लेते हैं।
मन्नत के कारण दण्डवत यात्रा कर रहे प्रहलाद
प्रह्लाद को देखकर लोग सोचते हैं कि आखिर ऐसी कौन सी मन्नत होती है, जिसे पूरा करने में इतनी मेहनत लगती है। प्रहलाद अपनी उस मन्नत के बारे में तो नहीं बताते, लेकिन यह जरूर कहते हैं कि हमारे इस कठिन परिश्रम में भगवान का आशीर्वाद साथ है। कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आए, महाकाल थाने में पदस्थ एसआई चंद्रभान सिंह ने उन्हें खाने पीने का सामान दिया और रास्ते के लिए कुछ चीजे भी बांधकर दे दी।