- उज्जैन में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल: दूल्हे ने लौटाए 50 लाख के कैश और सोना, सिर्फ अंगूठी ली
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर खुले चांदी द्वार, बाबा का हुआ पंचामृत अभिषेक
- सिंहस्थ के लिए पुलिस को तैयार कर रहा प्रशासन: उज्जैन में पुलिस अफसरों की 21 दिन की खास ट्रेनिंग शुरू, 41 विषयों पर रहेगा फोकस; 117 अधिकारी बनेंगे “मास्टर ट्रेनर”
- उज्जैन में भस्म आरती में शामिल हुए बिहार के पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा: नंदी हॉल में बैठकर किए दर्शन, महाकाल से मांगा आशीर्वाद
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: त्रिपुण्ड, त्रिशूल और डमरू से सजे बाबा, गूंजी ‘जय श्री महाकाल’
पंच कल्याणक पूजन व ध्वजारोहण, आज सिद्धचक्र पूजा, कल शोभायात्रा
दानीगेट स्थित अवंति पार्श्वनाथ के तीन शिखर वाले मंदिर की पहली वर्षगांठ के मौके पर गुरुवार को पार्श्वनाथ पूजन व ध्वजारोहण किया गया। शुक्रवार को मंदिर में सिद्धचक्र महापूजा व शनिवार को चल समारोह के साथ ध्वजारोहण होगा।
गच्छाधिपति जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से अवंति पार्श्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कर तीन शिखर वाले जिनालय का निर्माण किया गया है। इस मंदिर का लोकार्पण 2019 में हुआ था। इसके लिए कार्तिक मेला प्रांगण में बने राजमहल जैसे पांडाल के कारण यह मंदिर चर्चा में आया था। लोकार्पण की पहली वर्षगांठ 8 फरवरी को मनाई जाएगी। इसके पहले गुरुवार से वर्षगांठ महोत्सव की शुरुआत हुई। मंदिर में पार्श्वनाथ पंचकल्याणक पूजन हुआ। ट्रस्ट के सचिव चंद्रशेखर डागा के अनुसार शांतिनाथ महिला मंडल, शांति सुलोचन मंडल ने पूजा कराई। 7 फरवरी को सुबह श्री सिद्धचक्र महापूजा होगी, 8 फरवरी को सुबह 9 बजे ध्वजा चल समारोह शांतिनाथ मंदिर से निकलेगा जो प्रमुख मार्गों से होकर अवंति पार्श्वनाथ मंदिर दानीगेट पहुंचेगा। यहां दोपहर12.39 बजे ध्वजारोहण होगा। मंदिर में सुबह 10.30 बजे सत्तरभेदी पूजन होगी।
ध्वजारोहण संघवी कुशल राज गोलेछा बैंगलुरु करेंगे। श्री चिंतामणि पारसनाथ कायमी ध्वजा हीरालाल, कुमार विकास तथा आदेश्वर कायमी ध्वजा के लाभार्थी मांगीलाल, जितेंद्र, मनीष मालू परिवार सूरत है। रितेश जैन एवं तरूण डागा ने बताया कि संपूर्ण महोत्सव संयोजक जिनेश्वर युवा परिषद है।
विक्रमादित्य काल में बना था मंदिर
अवंति पार्श्वनाथ तीर्थ आचार्य सिद्धसेन दिवाकर ने 2000 साल पहले राजा विक्रमादित्य के काल में बनाया था। कल्याण मंदिर स्तोत्र की रचना करते हुए शिवलिंग में से भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को प्रकट किया था। प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार गच्छाधिपति जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी एवं देश भर से से आए 200 से अधिक साधु-साध्वी की मौजूदगी 13 से 18 फरवरी 2019 तक चले महोत्सव में हुआ था। यह मंदिर जीर्णोद्धार के बाद निर्माण कला का आकर्षक उदाहरण बन गया है। शहर आने वाले पर्यटक और जैन समाज के यात्री इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं।