- महाकाल मंदिर पहुंचे सुनंदा शर्मा और मनीष मल्होत्रा: नंदी हॉल से किए दर्शन, लिया आशीर्वाद
- एक्ट्रेस सारा अर्जुन ने महाकाल में की भस्म आरती: सुबह 4 बजे पहुंचीं, 2 घंटे तक रहीं शामिल
- श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती, दिव्य श्रृंगार के साथ हुए बाबा महाकाल के दर्शन; आरती में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु
- पंचकोशी यात्रा 12 अप्रैल से: 2 दिन पहले ही उज्जैन पहुंचने लगे श्रद्धालु, हर साल 2-3 लाख की भागीदारी
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार, गूंजी ‘जय श्री महाकाल’
महाकाल को ठंडक देने के लिए मिट्टी के 11 कलश:सुबह भस्म आरती से संध्या पूजन के पूर्व तक भगवा महाकाल पर सतत ठंडे जल की धारा
विश्व प्रसिद्द महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल को भी गर्मी नहीं लगे इसके लिए मंदिर के पंडित और पुजारियों ने मिलकर ठंडे पानी की गलंतिका शिवलिंग के ऊपर बाँधी है। इससे लगातार पानी शिवलिंग पर आता है ताकि भगवान महाकाल को गर्मी से बचाया जा सके। देश के कई हिस्सों में अभी से पारा चढ़ने लगा है उज्जैन की बात करे तो बीते दिन में ही अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस तक पंहुच गया था।
भगवान महाकालेश्वर को वैशाख एवं ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में ठंडक करने के लिए पुजारी-पुरोहितों द्वारा प्रतिवर्ष गलंतिका (मटकी) के 11 कलश बांधे जाते है। इस बार वैशाख कृष्ण प्रतिपदा पर बुधवार को गर्भ गृह में शिवलिंग के ऊपर सतत जलधारा के लिए मटकियां बांधी गई। इन मटकियों से सुबह भस्म आरती से संध्या पूजन के पूर्व तक भगवान महाकाल पर सतत जल की धारा प्रवाहित की जाती है। यह क्रम करीब दो महिने तक रहेगा।
ये है मान्यता …
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में कैलाश निवासी जहां बर्फ से घिरी पहाड़ियां होती है। इसके चलते गर्मी के मौसम के दो माह भगवान महाकाल को शीतलता प्रदान करने के लिए भक्त इस तरह का जतन गर्मी में करते हैं। इसी प्रकार तेज ठंड के दिनों में भगवान को गर्म जल से स्नान कराया जाने की परंपरा निभाई जाती है। उसी तरह भीषण गर्मी से राहत के लिए तैयारी की जाती है। इसके तहत वैशाख कृष्ण प्रतिपदा बुधवार को महाकाल मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग पर मिट्टी के 11 कलश बांधे गए।
नियमित चांदी के कलश की जलधारा के अलावा 11 अतिरिक्त मिट्टी की मटकियों से जलधाराएं प्रवाहित की जाएंगी। माना जाता है कि इन कलश से प्रवाहित जलधारा को गंगा, यमुना, गोदावरी सहित अन्य नाम लिखकर शीतलता के लिए बांधी जाती है। वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से यह मटकियां लगाई जाती हैं जो ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तक करीब दो माह बंधी रहेगी। मान्यता है कि भगवान महाकाल इससे तृप्त होकर राष्ट्र व प्रजा के कल्याण के लिए सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
गर्मी से शहर का हाल भी बेहाल
अप्रैल माह खत्म होते होते मई से पहले ही आसमान से आग बरसने लगी है। मंगलवार इस सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अनुसार मंगलवार को अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री और न्यूनतम 19 डिग्री दर्ज किया गया। इसके पहले 26 अप्रैल को दिन का तापमान 40 डिग्री दर्ज किया गया था। एक सप्ताह में अधिकतम तापमान 4.5 डिग्री बढ़ गया है, दिन में धूप के तेवर आने वाले दो दिन और तीखे रहेंगे।