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लव जिहाद के प्रदेश में 28 केस, उज्जैन में एक भी नहीं
पांच महीने पहले ही प्रदेश में लागू हुआ कानून, इंदौर में सबसे ज्यादा 5 केस
उज्जैन।राज्य सरकार द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए लागू कानून का काफी हद तक असर नजर आने लगा हैं। 5 महीने के दौरान उज्जैन में लव जिहाद का एक भी केस सामने नहीं आया हैं। इस अवधि में प्रदेश में 28 केस प्रकरण दर्ज हुए है,जिसमें सबसे ज्यादा इंदौर में हैं।
प्रदेश में नया कानून लागू होने के बाद 5 महीने में लव जिहाद के 28 केस दर्ज हुए हैं। 37 आरोपी गिरफ्तार किए गए। कानून लागू होने के बाद हर महीने औसतन 5 केस दर्ज हुए। प्रदेश में सबसे ज्यादा 5 केस इंदौर और सबसे कम 1 केस भोपाल में शाहजहांनाबाद थाने में दर्ज हुआ। पांच महीने उज्जैन में इस तरह का कोई मामला नहीं आया हैं।
बताया जाता है कि विधानसभा में गृहमंत्री ेसे पूछा गया था, मार्च 2021 से अब तक प्रदेश में लव जिहाद और जबरिया धर्म परिवर्तन के कितने प्रकरण दर्ज किए। कितने को गिरफ्तार किया है। जवाब में गृह मंत्री की ओर से बताया गया कि इस तरह के 28 केस दर्ज किए हैं। खंडवा व सिवनी में 3, शहडोल, हरदा व छतरपुर में 2 मामले, रतलाम, बड़वानी, सीहोर, नरसिंहपुर, शाजापुर, धार, अशोकनगर, ग्वालियर, सतना व खरगोन में एक-एक मामला दर्ज किया। 37 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 6 जमानत पर छूटे हैं। 31 आरोपी जेल में हैं।
बढ़ रहे थे मामले
बता दे कि प्रदेश में कानून लागू नहीं होने के पहले तक धर्म परिवर्तन और लव जिहाद के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। इसी के चलेत कानून की आवश्यकता महसूस की गई थी। इसके सख्त प्रावधानों की वजह से अब धर्म परिवर्तन के मामलों में फिलहाल कमी आने लगी है।
धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कानून
राज्य सरकार ने लव जिहादियों पर नकेल कसने के लिए कानून बनाया है। इसमें सख्त प्रावधान किए गए हैं। नाम बदलकर प्यार के नाम पर धोखा देने और धर्म परिवर्तन करने वालों के साथ इसमें सहयोगियों के लिए भी सजा तय की गई है। खास बात है, सरकार ने लव जिहाद के खिलाफ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2020 को राज्यपाल की मंजूरी के बाद 48 घंटे में ही लागू कर दिया था।
देश में मध्य प्रदेश सहित 10 राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कानून है। जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इसके लिए कानून हैं। हिमाचल, उत्तराखंड और राजस्थान में 5 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। एससी-एसटी और नाबालिग के मामले में यह सजा 7 साल की है, जबकि मध्य प्रदेश में 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। इन अपराधों के लिए अधिकतम एक लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।