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लोकसभा चुनाव… जिले के दो विधायकों को योग्य उम्मीदवार बता रहे कांग्रेस नेता
विधायक व मंत्रियों को टिकट नहीं देगी कांग्रेस
उज्जैन। इस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस भाजपा एवं अन्य दलों ने चुनावी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त किए गए लोकसभा चुनाव प्रभारी एवं पर्यवेक्षक विधानसभा क्षेत्रों में भ्रमण करके कांग्रेस नेताओं से प्रत्याशियों को लेकर रायशुमारी कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव को लेकर उज्जैन संसदीय क्षेत्र से ४० से ज्यादा नेताओं ने दावेदारी करते हुए अपने आवेदन वरिष्ठ नेताओं को सौंपे हैं।
बताया जाता है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश के मंत्री एवं विधायकों को इसलिए चुनाव नहीं लड़वाना चाहती है क्योंकि यदि वह चुनाव जीत भी जाते हैं तो संबंधित विधानसभा चुनाव क्षेत्र में फिर से चुनाव करवाना होगा और यदि ऐसे में भाजपा का प्रत्याशी चुनाव में विजय होता है तो विधानसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है।
उज्जैन जिले में दावेदार के रूप में तराना के विधायक महेश परमार, घट्टिया के विधायक रामलाल मालवीय, तराना के पूर्व विधायक बाबूलाल मालवीय, पूर्व सांसद सत्यनारायण पंवार, आदि का नाम चल रहा है।
कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं का मानना है कि योग्य उम्मीदवार के रूप में महेश परमार प्रथम एवं रामलाल मालवीय द्वितीय है। लेकिन कांग्रेेस के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वह चाहते हुए भी परमार एव मालवीय में से शायद ही किसी को प्रत्याशी बनाए। जबकि जातिगत समीकरण को दृष्टिगत रखते हुए दोनों विधायक कसौटी पर खरे उतर रहे हैं।
सिलावट का नाम चर्चा में
प्रदेश शासन के मंत्री तुलसीराम सिलावट के पुत्र नितेश सिलावट का नाम दावेदार के रूप में चर्चा में हैं। उज्जैन संसदीय क्षेत्र से पूर्व में इंदौर के नेता तुलसीराम सिलावट, सज्जनसिंह वर्मा, सज्जनसिंह विश्नार, प्रेमचंद्र गुड्डू को चुनाव लड़वाया गया। इनमें से प्रेमचंद्र गुड्डू सिर्फ एक बार चुनाव जीते। उज्जैन जिले के ज्यादातर नेता चाहते हैं कि जिले के ही किसी नेता को प्रत्याशी बनाया जाना चाहिए।
यह भी दावेदार
उज्जैन संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से जो नेता दावेदारी कर रहे हैं उनमें मुकेश परमार, नरेन्द्र कछवाय, जगदीश ललावत, बीएल चौहान, दीपक मेहरे, तेजू बाबा, ओपी लोट, सुरेन्द्र मरमट, जितेन्द्र तिलकर, वंदना मिमरोट, सहित ४० नेता शामिल है।
कुमारिया का नाम भी उभरा
जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए करण कुमारिया को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यदि दोनों विधायकों को पार्टी मौका नहीं देती है तो कुमारिया को चुनाव लड़वाया जा सकता है। युवा होने के साथ ही चर्चित चेहरा है।