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सिमी बंदियों के भागने के बाद भोपाल में बुलाई मीटिंग
भोपाल जेल से फरार सिमी आतंकियों की घटना पर सुरक्षा के मसले पर डीजी जेल गंभीर हो गये हैं। इसी को लेकर डीजी ने सभी जेल सुप्रीटेंडेंट को भोपाल तलब किया है। उज्जैन जेल सुप्रीटेंडेंट को भी भोपाल में सारी जानकारी के साथ अपडेट होकर आने के लिए कहा गया है। पता चला है कि भोपाल में डीजी की बैठक दोपहर बाद तक जारी रही।
सिमी आतंकियों के भोपाल सेंट्रल जेल से फरार होने की घटना पर समूचा जेल विभाग गहरे कोमा में है। एक के बाद एक उज्जैन में हर दिन कोई आदेश चला आ रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार उज्जैन जेल सुप्रीटेंडेंट जे.पी. ताम्रकर को डीजी भोपाल ने तत्काल भोपाल बुलाया और कई जानकारी के साथ अपडेट होने को कहा है। राजधानी भोपाल में मीटिंग भी शुरू हो चुकी है, जो दोपहर बाद तक जारी रही।
2200 बंदियों की सुरक्षा की जवाबदारी 135 के कंधों पर
जेल में करीब २२०० बंदी हैं। यदि सुरक्षा मानकों की बात की जाए तो नियमानुसार ६ बंदी पर एक सुरक्षाकर्मी तैनात होना चाहिये, लेकिन भैरूगढ़ जेल में १३५ सुरक्षाकर्मियों की ही तैनाती है जो तीन शिफ्टों में काम करते हैं। इनमें २० महिला सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। ऐसे में इन सुरक्षाकर्मियों में कुछ को स्वास्थ्य कारणों और पारिवारिक कारणों के कारण अवकाश भी दिया जाता है। इनके वीकली ऑफ पर भी सुरक्षा संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है। जेल मुख्यालय में करीब ५० से अधिक सुरक्षाकर्मियों की मांग भेजी जा चुकी है, जो बरसों से पैडिेंग चल रही है। ऐसे में खूंखार कैदियों पर नियंत्रण बनाना भी जवानों के लिए जोखिम का काम होता है।
जेल अधीक्षक को एक अर्दली
नियमानुसार जेल अधीक्षक को एक अर्दली दिया गया है। इस तरह कुल सुरक्षाकर्मियों की संख्या में १३५ में एक सुरक्षाकर्मी तो हमेशा से ही कम रहता है। इधर कई सुरक्षाकर्मी तो ऐसे भी हैं जो अनफिट हो चुके हैं, या फिर वे रिटायरमेंट के नजदीक हैं। उन सुरक्षाक र्मियों को यहां डाक लगाने और कैदियों को जेल वार्ड जिला अस्पताल लाने-ले जाने के साथ अन्य कामों पर लगाया जाता है। यदि औसतन आंकलन किया जाए तो करीब ११० सुरक्षा कर्मी ही जेल की सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए हैं। २२०० खूंखार कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था ११० के भरोसे छोडऩा यहां भी भविष्यगत एक बड़ी गंभीर घटना की ओर इशारा कर रहा है।
ये कहना है इनका
मैं अभी भोपाल हूं। मीटिंग में आया हूं। फिलहाल जेल की सुरक्षा व्यवस्था के मान से जवानों की कमी है, जिसे हम कई बार भोपाल मुख्यालय को सूचित कर चुके हैं। इस बार भी हम सुरक्षाकर्मियों की कमियों का मुद्दा उठाएंगे। 2200 बंदियों पर 335 का नियंत्रण कैसे होता होगा, इसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं।