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सूर्य सिद्धांत से तिथि हो तो मिलता पुण्य – शंकराचार्य
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का कहना है कि तिथियों के मतभेद की राष्ट्रीय समस्या है। नए ज्योतिषियों के कारण यह समस्या बढ़ी है। इसके निदान के लिए सभी ज्योतिषियों को एकजुट करना होगा।
पर्व त्योहारों की तिथियों को लेकर ज्योतिषियों में मतभेद सामने आते रहे हैं। जन्माष्टमी, मकर संक्रांति जैसे पर्वों पर भी यह समस्या सामने आई है। शहर में हुए राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलनों में इस समस्या के निदान के लिए सनातन धर्म के प्रमुख शंकराचार्यों से मार्गदर्शन लेने का विचार आया था। निश्चलानंद सरस्वती के शहर आगमन पर अनेक ज्योतिषियों ने भी उनका आशीर्वाद लिया। भास्कर ने शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती से जब इस बारे में मार्गदर्शन करने की बात की तो उन्होंने कहा कि कुछ पर्वों में संप्रदाय-परंपरा से भेद हैं। परंपरा से प्राप्त भेद को लेकर मतभेद नहीं कहना चाहिए। अन्य मतभेदों का कारण नए ज्योतिषियों द्वारा भारतीय काल गणना की जगह पाश्चात्य की गणना की नकल करना है। स्वामीजी ने कहा कि पुरी में हमने मतभेद समाप्त करने के लिए सभी ज्योतिषियों को एकमत किया। सूर्योदय का आकलन ठीक नहीं होने से मतभेद बनते हैं। नए ज्योतिषियों में पाश्चात्य का प्रभाव है।
स्वामीजी ने कहा कि सूर्य सिद्धांत से निर्धारित की गई तिथि पर पर्व से पुण्य मिलता है। इसलिए इस सिद्धांत का ही उपयोग होना चाहिए। दूसरे सिद्धांत से नहीं मिलता। उन्होंने बताया शारदा पीठ के शंकराचार्य ने भी 10 साल पहले प्रयास किया था तथा पंचांग भी निकाला था। उसका कितना पालन हुआ पता नहीं।