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हिरण्यकश्यप वध के बाद इस स्थान पर क्रोध शांत किया था भगवान नृसिंह ने
उज्जैन:हिरण्य कश्यप वध के बाद भी जब नृसिंह भगवान का क्रोध शांत नहीं हुआ तो तीनों लोक के देवताओं में भय व्याप्त हो गया। इस दौरान भगवान महादेव ने नृसिंह देव को शिप्रा नदी में स्नान करने की सलाह दी और इस स्थान पर स्नान के बाद भगवान नृसिंह का क्रोध शांत हुआ और वह इसी स्थान पर विराजित हो गये। इस स्थान को आज नृसिंह घाट के नाम से शहरवासी जानते हैं।
मंदिर के पुजारी अजय दाणी निवासी शीतलामाता की गली ने चर्चा में बताया कि पौराणिक महत्व के इस नृसिंह मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के अवंतिका खण्ड में आता है। भगवान महादेव की सलाह के बाद भगवान नृसिंह ने इसी स्थान पर आकर शिप्रा नदी में स्नान किया था जिसके बाद उनका क्रोध शांत हुआ और भगवान नृसिंह यहां विराजित हुए। पुजारी दाणी बताते हैं कि मंदिर में भगवान नृसिंह की प्राचीन प्रतिमा है जिसमें बाएं हाथ की गोद में लक्ष्मीजी विराजित हैं। प्रतिवर्ष यहां नृसिंह जयंती पर प्रकटोत्सव मनाया जाता है। मंदिर में प्रतिदिन सुबह 7.30 पर नियमित आरती होती है। नृसिंह जयंती पर आरती के पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का दुग्धाभिषेक होगा और शाम को विशेष आरती के बाद मोहन भोग लगाया जायेगा।
मंदिर उपेक्षा का शिकार : पौराणिक महत्व के इस मंदिर के ऊपर सिंहस्थ के पहले शिखर का निर्माण नगर निगम द्वारा कराया गया था। यहां बंदरों की संख्या अधिक होने के कारण बंदर दिनभर यहां से वहां कूदते हैं जिस कारण शिखर क्षतिग्रस्त हो चुका है। यहां नियमित सफाई के अलावा नृसिंहघाट पर महिलाओं के वस्त्र बदलने के शेड भी नहीं लगे हैं।
तैराकों की पहली पसंद नृसिंह घाट: शिप्रा नदी में नियमित स्नान करने वाले तैराकों की पहली पसंद नृसिंह घाट है। यहां प्रतिदिन बालकों से लेकर वृद्ध तक तैराकी करने आते हैं। तैराकों द्वारा नृसिंह भक्तमंडल भी बनाया गया है जो वर्ष भर धार्मिक आयोजन इसी स्थान पर करते हैं।