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64/84 श्री पशुपतेश्वर महादेव
64/84 श्री पशुपतेश्वर महादेव
प्राचीन समय में एक राजा थे पशुपाल। वे परम धर्मात्मा और पशु के पालन में विशेष ध्यान रखते थे। एक बार राजा समुद्र के किनारे गए ओर उन्होने वहां पांच पुरूषों ओर एक स्त्री को देखा। राजा उन्हे देख मुर्छित हो गया। वे पांचों पुरूष ओर स्त्री उसे घर ले आए। राजा जब होश में आया तो उसने उनसे युद्ध किया। इस बीच पांच पुरूष और आ गए। राजा उनमें से किसी को भी मार नही पाया ओर वे दसों पुरूष और स्त्री राजा के शरीर में लीन हो गए। राजा दुखी हो गए। इस बीच वहां नारद मुनि आए ओर राजा ने उन्हे पूरी बात बताई ओर उनसे पुरूषों ओर स्त्री का परिचय पुछा। नारद मुनि ने कहा कि जो दस पुरूष थे उनमें पांच ज्ञानेन्द्रि ओर पांच कामेन्द्रि थी ओर जो स्त्री थी वह मन रूप बुद्धि थी। वे क्रोधवश तुम्हारे पास आए थे। तुम्हारे पितामह ने यज्ञ में महादेव का भाग और स्थान नहीं रखा था। जिस पर महादेव ने आपने धनुष से देवताओं को दंड दिया, जिससे सभी पशु योनि को प्राप्त हुए। सभी देवताओं ने ब्रम्हा से निवेदन किया ओर फिर भगवान शिव के पास पहुंचे । यहां शिव ने प्रसन्न होकर उनसे कहा कि आप सभी महाकाल वन में जाओं ओर वहां लिंग रूपी पशुपतेश्वर महादेव के दर्शन करों। सभी देवता महाकाल वन में आए ओर यहां शिवजी के दर्शन किए ओर पशु योनि से मुक्त हुए। मान्यता है कि जो भी मनुष्य पशुपतेश्वर के दर्शन करजा है ओर पूजन करता है उसके पूर्वज भी पशु योनि से मुक्त हो जाते है।