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नागपंचमी:रात 12 बजे खुले नागचंद्रेश्वर के पट, सुबह साढ़े 5 बजे से भक्तों को मिला प्रवेश, महाकाल ने धारण किया शेषनाग
उज्जैन विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के शिखर के मध्य स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट नागपंचमी पर शुक्रवार रात 12 बजे खुले। महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनित गिरि ने पूजन-अर्चन किया। करीब एक घंटे के त्रिकाल पूजन के बाद मंदिर में नागचंद्रेश्वर की आरती की गई। मंदिर के पट शनिवार रात 12 बजे तक खुले रहेंगे। मंदिर साल में एक बार ही 24 घंटे के लिए खुलता है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण नागचंद्रेश्वर व महाकालेश्वर के दर्शन केवल वही श्रद्धालुओं कर पा रहे हैं, जिन्होंने ऑनलाइन प्री-बुकिंग कराई है।

काेरोना के कारण इस वर्ष श्रद्धालुओं को शनिवार तड़के 5.30 बजे से प्रवेश दिया गया। हालांकि नागचंद्रेश्वर मंदिर में तो प्रवेश प्रतिबंधित है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए ओंकारेश्वर परिसर में एलईडी पर लाइव दर्शन की व्यवस्था की गई है। वहीं, शनिवार को महाकाल मंदिर में नागपंचमी का पर्व मनाया गया। तड़के भस्मआरती के बाद भगवान महाकालेश्वर को शेषनाग धारण कराया गया। श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश शंख द्वार की ओर से दिया गया। हालांकि दर्शनार्थियों को पूजन सामग्री, दूध लेकर प्रवेश पर मनाही है।
भगवान शिव तथा पार्वती की यह दुर्लभ प्रतिमा
11वीं शताब्दी के परमार कालीन इस मंदिर के शिखर के मध्य बने नागचंद्रेश्वर के मंदिर में शेष नाग पर विराजित भगवान शिव तथा पार्वती की यह दुर्लभ प्रतिमा है। साल में केवल एक बार ही खुलने वाले इस मंदिर के दर्शन के लिए हर साल करीब दो से तीन लाख भक्त आते थे। मान्यता है कि भगवान नागचंद्रेश्वर के इस दुर्लभ दर्शन से कालसर्प दोष का भी निवारण होता है। वहीं ग्रह शांति, सुख-समृद्धि और उन्नति के लिए भी लाखों श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर पर मत्था टेकने पहुंचते हैं।
इस बार भक्ताें का इंतजार खत्म नहीं हुआ
नागपंचमी के दिन महाकाल मंदिर के शिखर के मध्य में स्थित नागचंद्रेश्वर के दर्शनों के लिए लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती थी, लेकिन इस बाद कोरोना के कारण भक्तों को अपने आराध्य से सीधे दर्शन नहीं हो पाए। इसके लिए उन्हें अगले साल तक का इंतजार करना होगा। भगवान नागचंद्रेश्वर के इस दुर्लभ दर्शन को पाने की चाह में बच्चे, बूढ़े, महिला-पुरुष सभी घंटों लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते थे। इस बार मंदिर में भक्तों की आवाजाही नहीं के बराबर है। हालांकि मंदिर प्रशासन ने लाइव दर्शन की व्यवस्था की है।