- तराना में दो दिन हिंसा और तनाव के बाद हालात सामान्य: आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ में बसें-कारें जलीं, 19 गिरफ्तार; पुलिस तैनाती जारी
- 77वें गणतंत्र दिवस के लिए उज्जैन तैयार: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव फहराएंगे तिरंगा, कार्तिक मेला ग्राउंड में पहली बार होगा जिला स्तरीय आयोजन
- महाकाल मंदिर में शनिवार तड़के खुले पट, भस्म आरती में साकार रूप में दिए बाबा ने दर्शन
- बसंत पंचमी पर सांदीपनि आश्रम में विद्यारंभ संस्कार, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली में गूंजे पहले अक्षर
- बसंत पंचमी पर महाकाल दरबार पीले रंग में सजा, आज से होली तक रोज अर्पित होगा गुलाल
ज्योतिषियों में पर्व को लेकर मतभेद, दो दिन मनेगा धनतेरस का पर्व
दीपावली के पर्वों में धनतेरस को लेकर ज्योतिष विद्वान एकमत नहीं है। पंचांग भेद से धनतेरस 12 व 13 नवंबर दोनों दिन मानी जा रही है। प्राचीन कालगणना के मानने वाले ज्योतिषविद् 12 को धनतेरस बता रहे हैं। उनके पंचांगों में भी 12 को धनतेरस बताई गई है।
पंचांगकर्ता पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार गणना की प्राचीन विधि से पंचांग बनाने वाले सभी विद्वान 12 को धनतेरस मान रहे हैं। सभी प्राचीन गणना वाले पंचांगों में धनतेरस इसी दिन बताई है। क्योंकि धनतेरस का पर्व प्रदोष में तिथि होने पर मनाया जाता है।
इसलिए 12 को धनतेरस मनाना श्रेष्ठ है। पंचांगकर्ता पं. श्यामनारायण व्यास के अनुसार धनतेरस 13 नवंबर को रहेगी। प्रदोषकाल में भी तेरस 13 को ही है। इसलिए 13 को पर्व मनाया जाना चाहिए। ज्योतिषविद् पं. मनीष शर्मा के अनुसार पंचांग भेद के कारण इस बार दीपावली की सभी तिथियों को लेकर इसी तरह के मतभेद हैं।
क्योंकि तिथियों का परिवर्तन ऐसे समय हो रहा है जिससे दो दिन तिथि मानी जा रही है। हालांकि अधिकांश पंचांगों में धनतेरस 12 नवंबर को बताई गई है। ज्योतिषविद् अर्चना सरमंडल के अनुसार पंचांगों में 12 व 13 दोनों दिन धनतेरस मानी गई है। लोकाचार के अनुसार धनतेरस की खरीदी 13 नवंबर को की जाना श्रेष्ठ है।