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लाॅकडाउन का निगम ने उठाया फायदा:सीवरेज लाइन के लिए रामघाट खोदा, जमीन में से निकले पुरावशेष
नगर निगम ने कोरोना लॉकडाउन का फायदा लेते हुए रामघाट पर सीवरेज पाइप लाइन डालने का काम शुरू कर दिया। घाट पर की जा रही खुदाई में प्राचीन अवशेष भी निकल रहे हैं। इन अवशेषों से घाट की प्राचीनता की जानकारी मिल सकती है। लेकिन इन्हें सहेजने की व्यवस्था नहीं की गई है। यह अवशेष मलबे के साथ डंप किए जा सकते हैं। इससे पुरातत्व अवशेष नष्ट हो सकते हैं।
रामघाट व दत्त अखाड़ा घाट अत्यंत प्राचीन तीर्थ हैं। यहीं पर सिंहस्थ के शाही स्नान होते हैं। इनके प्राचीन स्वरूप के साथ पहले भी काफी छेड़छाड़ हो चुकी है, जिनसे इनका पुरातन स्वरूप लगभग नष्ट हो चुका है। घाट पर काले पत्थरों की जगह लाल पत्थर लगाए जाने से घाट की हालत हमेशा दयनीय बनी रहती है। कच्चे पत्थर जगह-जगह से टूट चुके हैं। हर साल इनकी मरम्मत पर नगर निगम को लाखों रुपए खर्च करना पड़ते हैं।
इन पत्थरों के कारण घाट पर गरमी में पैदल नहीं चल सकते, बारिश में इन पर काई जम जाती है। इनके बदरंग हो जाने से घाट का सौंदर्य भी खराब हो रहा है। पूरे घाट पर कई जगह पर टूटे पत्थर देखे जा सकते हैं। कई जगह से यह लाल पत्थर बाढ़ में बह चुके हैं। रामघाट पर पहले भी सीवर लाइन के लिए खुदाई की गई थी। यह लाइन जमीन के भीतर ही है। अब दोबारा यहां पाइप लाइन डाली जा रही है। इसके लिए पूरे घाट को खोदा जा रहा है। यह काम बिना किसी पुरातत्व विशेषज्ञ की निगरानी के हो रहा है। जबकि घाट और घाट के आसपास का पूरा क्षेत्र पुरातत्व महत्व का है।
जैसा अभी था, वैसा ही बनाकर देंगे
इधर टाटा के प्रोजेक्ट इंचार्ज आशीष सिंघई का कहना है कि हम तो अभी घाट की जैसी स्थिति है वैसी ही बना कर देंगे। यानी लाल पत्थर निकाले हैं तो वही पत्थर से सुधार कार्य कराया जाएगा। उनका कहना है कि हमारा काम केवल पाइप लाइन डाल कर रिपेयर करना है। इधर जानकारों का कहना है कि प्राचीन रामघाट की खुदाई होने से घाट की मजबूती कमजोर हो रही है। आसपास के प्राचीन भवनों को भी खतरा हो सकता है। शहर में सीवरेज पाइप लाइन जहां डाली गई हैं वहां रिपेयर वर्क कराया गया है। रिपेयर कितना मजबूत है, यह शहर में जहां-तहां देखा जा सकता है। नीलगंगा रोड पर सड़क धंस चुकी है। बारिश के पहले कई जगह सड़कें उखड़ गई हैं।