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यह युद्ध है और हमारेे योद्धा दिन-रात डटे हैं:किसी तपती भट्टी के पास रहने जैसा है 39 डिग्री गर्मी में पीपीई किट पहनना
39 डिग्री के पास पहुंचता पारा और उसी तीखी गर्मी में पीपीई किट से पूरी तरह पैक डॉक्टर। जिनके पास अपने भी जाने से डर रहे, उनके बीच रहना। ऑक्सीजन, दवा, देखरेख… सबकुछ तो कर रहे हैं ये डॉक्टर। जिंदगी बचाने की जी-तोड़ कोशिश। जिद बस एक- कैसे भी हर मरीज बच जाए। किसी की जान न जाए। सरकारी अस्पताल हों या निजी। डॉक्टर दिन-रात लगे हैं। जब आप बिना एसी-कूलर और पंखे के एक मिनट नहीं रह पा रहे, उस समय में ये डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ पीपीई किट में पूरी तरह से पैक होकर चिकित्सा सेवाएं देने में जुटे हैं। वे मरीजों को इलाज देने के साथ ही उनका हौसला भी बढ़ा रहे हैं।
और कुछ मरीजों के परिजन भी खतरे के बाद भी अपनों को छोड़ नहीं रहे हैं। 123 बेड के इस अस्पताल में 170 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। बेड भर जाने के बाद यहां पर अस्पताल के गलियारों में, ऑफिस चैंबर और अस्पताल के बाहर की मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। वार्ड में भी खुली जगह पर मरीज भर्ती हैं। यहां से पैरामेडिकल स्टाफ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए जगह तक नहीं मिल रही है।
परिवार के लोग भी अपने मरीज की सेवा में लगे हुए हैं, उनके खाने व दवाइयों के इंतजाम में लगे हैं। मरीज का हौसला बढ़ा रहे हैं कि बस कुछ ही दिन में आप ठीक हो जाओगे। कह रहे…दूसरो का उदाहरण देते हुए- अपनी कॉलोनी में रहने वाले अंकल जी भी पॉजिटिव आए थे, अब वे ठीक होकर घर आ गए हैं। उन्हें मोबाइल पर धार्मिक गीत सुना रहे, कॉमेडी शो दिखा रहे।